इस्लामाबाद। रावलपिंडी की एक कोर्ट ने ईशनिंदा के दोषी को मौत की सजा सुनाई है। गुरुवार को कोर्ट ने मोहम्मद असगर को ईशनिंदा का दोषी करार देते हुए उसे मौत की सज़ा सुनाई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नावेद इकबाल ने असगर पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
असगर को साल 2010 में सदीकाबाद से तब गिरफ्तार किया गया था, जब उसे पुलिस अधिकारियों समेत कई लोगों को खत लिखकर ये दावा किया था कि वो ईश्वर का दूत है। पुलिस ने असगर को पाकिस्तान पैनल कोड यानी पीपीसी की धारा 295-सी के तहत गिरफ्तार किया था।
क्या है धारा 295-सी में ?
पाकिस्तान पैनल कोड की धारा 295-सी के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति शब्द, भाषण, खत, किसी स्पष्ट चित्र, आरोप के जरिए पैगंबर मुहम्मद साहब के नाम को धूमिल करने की कोशिश करेगा तो उसे मौत या उम्रकैद की सज़ा भुगतनी पड़ेगी। साथ ही दोषी पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
किन सबूतों के आधार पर दोषी करार हुआ असगर ?
सरकारी वकील जावेद गुल ने कोर्ट में खत की वो कॉपी पेश की, जो असगर ने सदीकाबाद के एसएचओ को लिखी थी। चार पुलिस अधिकारियों ने भी कोर्ट में असगर के खिलाफ सबूत पेश किए।
वकील ने सबूत के तौर पर हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय भी कोर्ट में पेश की, जिससे ये साबित हुआ कि खत असगर ने ही लिखा था। इसके साथ ही सरकारी वकील ने इस केस को मजबूत बनाने के लिए कोर्ट में असगर का कबूलनामा भी पेश किया।
बचाव पक्ष के वकील की दलील
असगर मामले में बचाव पक्ष के वकील का जिम्मा लाहौर के साराह बिलाल को दिया गया था, लेकिन बाद में जब उन्होंने इस केस को लड़ने में अरुचि जाहिर की तो सरकार ने असगर के बचाव के लिए दूसरे वकील की नियुक्ति की।
बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि असगर मानसिक गड़बड़ी से जूझ रहा है। उसके केस को मानवतावादी आधार पर देखा जाना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने वकील के दावों की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया। मेडिकल बोर्ड ने जांच में पाया कि असगर की मानसिक स्थिति सामान्य है और वो किसी गड़बड़ी से नहीं जूझ रहा।
क्या है ईशनिंदा कानून?
पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून में इबादतगाहों को अपवित्र करने, मजहबी भावनाएं भड़काने, पैगंबर हजरत मोहम्मद की आलोचना और कुरान शरीफ को नुकसान पहुंचाने जैसे अपराधों के लिए सजा का प्रावधान है। इस कानून में कुरान को नुकसान पहुंचाने वाले के लिए उम्रकैद, जबकि पैगंबर की निंदा करने वाले के लिए मौत की सजा का प्रावधान है।
पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून भारत-पाकिस्तान के विभाजन से पहले लाया गया था, जब ब्रिटिश सरकार का शासन था। ये कानून धार्मिक भावनाओं को संरक्षित करने के लिए लाया गया था।
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