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रिपोर्ट: भारत की मिलिट्री ताकत पाक की चिंता का सबब, मोदी से थीं कई उम्मीदें

5 वर्ष पहले
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लंदन. भारत की बढ़ती फौजी ताकत से पाकिस्तान परेशान है। मोदी के पीएम बनने के बाद उसे उम्मीद थी कि वे रिश्ते सुधारने को लेकर नवाज शरीफ से कोई डील कर लेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसके बाद से पाकिस्तानी फौज और परेशान है। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। भारत की किस तरह की मिलिट्री पावर को लेकर पाकिस्तान को फिक्र...
- मंगलवार को इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटजिक स्टडीज (IISS) की एनुअल रिपोर्ट 'मिलिट्री बैलेंस 2016' जारी हुई।
- इसमें आईआईएसएस के सीनियर एक्सपर्ट बेन बैरी ने भारत-पाक रिश्तों पर अपनी स्टडी बताई है।
- बैरी भारत-पाक मिलिट्री-स्ट्रैटजिक रिलेशंस पर लंबे समय से काम कर रहे हैं। वे ब्रिटिश आर्मी में ब्रिगेडियर रहे हैं।
- बैरी के मुताबिक नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने पर इस्लामाबाद में काफी उत्साह का माहौल था।
- 'पाकिस्तान सरकार और कम्युनिटी को लगता था कि मोदी के सत्ता संभालते ही दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधरेंगे और तनाव कम होगा। जब इस दिशा में कुछ नहीं हुआ तो पाकिस्तान को निराशा हुई।'
- 'वहीं पाक भारत की पारंपरिक आर्मी में मॉडर्नाइजेशन पर नजर रखे हुए है।'
- 'भारत का अपनी आर्मी में अपाचे हेलिकॉप्टर, सी-130 एयरक्राफ्ट और टी-90 टैंक जैसे एडवान्स्ड वेपन्स शामिल करना पाकिस्तान की परेशानी की वजह है।'
- 'यही नहीं इस्लामाबाद भारत-यूएस न्यूक्लियर डील पर भी नजर रखे हुए है।'
और क्या कहा गया रिपोर्ट में?
- 'इस बात की पॉसिबिलिटी कम नजर आती है कि पाक अपने यहां मौजूद आतंकी गुटों पर कार्रवाई करेगा।'
- 'पाक आर्मी चीफ जनरल राहिल शरीफ ने 2014 में पेशावर के स्कूल में आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन जर्ब-ए-अज्ब चलाया था। इसका मकसद नॉर्थ वजीरिस्तान से आतंकियों का सफाया था।'
- 'हालांकि इसमें दो राय नहीं कि पाक आर्मी और पुलिस ने आतंकी गुटों और उनकी ताकत को काफी कम कर दिया है।'
पाकिस्तान के परेशान होने की क्या ये हैं तीन वजहें?
पाकिस्तानी आर्मी ने अगस्त के आखिर में अपने मुल्क की पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने कहा था कि उसके लिए देश के बाहर भारत के अलावा कोई और खतरा नहीं है। पाकिस्तानी आर्मी लगातार भारत की हथियारों की खरीददारी से भी परेशान नजर आ रही है।

1. भारत हथियारों की खरीद में सबसे आगे

भारत ने पिछले कुछ सालों में 6,31,700 करोड़ रुपए (100 बिलियन USD) के हथियार खरीदे हैं। अखबार डॉन की खबर के मुताबिक, भारत ने 80% हथियार पाकिस्तान को टारगेट के लिए खरीदे हैं। पाकिस्तान की मिलिट्री का कहना है कि इंडियन आर्मी ‘खरीददारी की होड़' में ऐसा कर रही है। बता दें कि भारत आर्म्स इम्पोर्ट के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है।

2. भारत का डिफेंस बजट भी पाकिस्तान से तीन गुना ज्यादा

पिछले 10 साल में भारत ने अपनी मिलिट्री पर खर्च को भी दोगुना कर दिया है। इस साल भारत ने डिफेंस बजट 2.46 लाख करोड़ रुपए (40.07 बिलियन USD) रखा है। यह पाकिस्तान से तीन गुना ज्यादा है। पाकिस्तान का डिफेंस बजट 78 हजार करोड़ रुपए है। भारत के पास नेवी वॉरशिप और टैंक भी पाकिस्तान से करीब-करीब तीन गुना ज्यादा हैं।

3. हर जंग में पाकिस्तान ने भारत से मुंह की खाई

पाकिस्तान ने 1947 के संघर्ष, 1965 और 1971 की जंग और 1999 में कारगिल वॉर में भारत से करारी हार का सामना किया है। पाकिस्तान जानता है कि वह जंग में कभी भी भारत से नहीं जीत सकता।
हमारी फौजी ताकत से नहीं जीत सकता पाकिस्तान
भारत
पाकिस्तान
एक्टिव फौजी
13.25 लाख
6.17 लाख
फाइटर प्लेन
761
387
हेलिकॉप्टर
584
313
सभी तरह के टैंक
6464
2924
नेवी वॉरशिप
202
74
एयरक्राफ्ट कैरियर
2
0
सबमरीन
15
8
सबसे ताकतवर मिसाइल
अग्नि-5, 5000 किमी रेंज
शाहीन-3, 2750 किमी रेंज
सालाना डिफेंस बजट
2.46 लाख करोड़ रुपए
78 हजार करोड़ रुपए
रिपोर्ट में मोदी सरकार को क्या दी गई नसीहत

- 'मिलिट्री बैलेंस 2016' के मुताबिक मोदी को डिफेंस सेक्टर में एफडीआई और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी की परमिशन देनी चाहिए।
- यही नहीं भारत की सिक्युरिटी फोर्सेस और एसेट्स की लिस्टिंग होना चाहिए।
- सरकार की 'मेक इन इंडिया' पॉलिसी का मकसद देश के डिफेंस-इंडस्ट्रियल बेस को एफडीआई के जरिए और मजबूत बनाना है। लेकिन ब्यूरोक्रेसी और कुछ रूल्स के चलते वादे पूरे करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
- भारत को अपनी ताकत बढ़ाने के लिए रूस, चीन, ईरान और नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) से बेहतर रिलेशन बनाने चाहिए। ताकि मिलिट्री कैपेबिलिटीज के साथ टेक्नोलॉजी भी बेस्ट हो सके।
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