इस्लामाबाद। भारत में
चीन व पाकिस्तान से घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं के बीच
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के नए प्रमुख के नाम का एलान हो गया है। लेफ्टिनेंट जनरल रिजवान अख्तर को यह पद दिया गया है। वह जहीर-उल-इस्लाम की जगह लेंगे और एक अक्टूबर से कार्यभार संभालेंगे। अख्तर आर्मी चीफ जनरल राहिल शरीफ के करीबी हैं और माना जा रहा है कि
पाकिस्तान में इस वक्त जिस तरह राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है, अख्तर की नियुक्ति शरीफ के लिए मददगार साबित हो सकती है। आईएसआई चीफ की नियुक्ति के अलावा पाकिस्तानी सेना में और कई बदलाव किए गए हैं।
कौन हैं रिजवान अख्तर?
जनरल रिजवान अख्तर पाकिस्तान के क्वेटा स्थित कमांड एंड स्टाफ कॉलेज से ग्रैजुएट हैं। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी और आर्मी वार कॉलेज से पढ़ाई की। वह फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट से ताल्लुक रखते हैं और पाकिस्तान के फाटा (संघीय शासित कबीलाई इलाके) में इन्फैंट्री ब्रिगेड और इन्फैंट्री डिवीजन का नेतृत्व कर चुके हैं।
आतंकवाद निरोधी गतिविधियों में दक्षलेफ्टिनेंट जनरल रिजवान अख्तर को आर्मी चीफ जनरल राहिल शरीफ का नजदीकी समझा जाता है। इससे पहले वह देश के दक्षिण-पूर्वी सिंध प्रांत में पैरामिलिट्री रेंजर्स के प्रमुख रह चुके हैं। अख्तर को
चरमपंथ निरोधी गतिविधियों में काफी दक्ष माना जाता है। इसी के मद्देनजर 2007-2010 के बीच उनकी पोस्टिंग अशांत दक्षिणी वजीरिस्तान इलाके में भी की गई थी। अख्तर के साथ काम कर चुके एक सैन्य अधिकारी ने कहा, "उन्होंने कराची जैसे शहर में निष्पक्ष और राजनीति से दूर रहते हुए काम किया है। उन्हें आतंकवाद निरोधी गतिविधियों में काफी तजुर्बा है। वह ऐसे पेशेवर सैनिक हैं जिन्होंने फाटा और कराची की अंदरूनी सुरक्षा, दोनों का अनुभव किया है।"
ऑपरेशन कराची में निभाई थी अहम भूमिका
कराची में आतंकवादियों और आपराधिक तत्वों पर काबू पाने के लिए कुछ साल पहले जो ऑपरेशन चलाया गया था, उसे लीड करने की जिम्मेदारी रिजवान अख्तर को सौंपी गई थी। हालांकि, बाद में सेना ने उनकी जगह दूसरे सीनियर अधिकारी को ऑपरेशन की कमान सौंप दी। यह तब्दीली ऐसे वक्त में की गई थी जब ऑपरेशन चरम पर था।
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