इस्लामाबाद। एक तरफ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ संयुक्त राष्ट्र में
कश्मीर मसले पर जनमत संग्रह की मांग कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर से पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अयोग्य ठहराने की याचिका स्वीकार कर ली गई है। याचिका इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की ओर से दायर की गई है। चीफ जस्टिस नसीरुल मुल्क की अध्यक्षता वाली बेंच 29 सितंबर को सुनवाई करेगी।
पीटीआई के सेंट्रल कमेटी के नेता इशक खकवानी ने बताया कि शरीफ के खिलाफ यह याचिका, 29 अगस्त को नेशनल असेंबली में आर्मी चीफ की भूमिका के संबंध में झूठ बोलने के लिए दायर की गई है। उनपर, इस्लामाबाद में हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों को खत्म करने के लिए सेना को मध्यस्थ बनाने का आरोप है।
वहीं, नवाज शरीफ का कहना है कि उन्होंने आर्मी चीफ राहिल शरीफ को सरकार और विरोधी पार्टियों (पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ और पाकिस्तान अवामी तहरीक) के बीच मध्यस्थ बनने का न्योता नहीं दिया। हालांकि, शरीफ को उस वक्त शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, जब सैन्य प्रवक्ता ने इस मामले में सैन्य भूमिका की पुष्टि की।
याचिका में कहा गया है कि नवाज शरीफ ने नेशनल असेंबली में सेना की भूमिका को धूमिल और संविधान का उल्लंघन किया है।
याचिका में लिखा है, "इससे साबित होता है कि नवाज शरीफ ने आर्मी चीफ की भूमिका के बावजूद असेंबली में झूठ बोला और संविधान के अनुच्छेद 62 (एफ) का उल्लंघन किया है।" पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 62 (एफ) के अनुसार, अगर कोई सदस्य, ईमानदार नहीं है तो उसे अयोग्य करार दिया जा सकता है।
(तस्वीर - संयुक्त राष्ट्र महासभा में नवाज शरीफ)