फोटो: कूलिंग टावर के अंदर का नजारा, इसमें पानी की धारा को ठंडा किया जाता है। ।
इंटरनेशनल डेस्क। रूस के राष्ट्रपति
व्लादिमीर पुतिन एक दिन के भारत दौरे पर पहुंचे। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा, तेल उत्खनन समेत तमाम क्षेत्रों में आपसी सहयोग के लिए 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। परमाणु ऊर्जा को लेकर हुए समझौते के तहत भारत में कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट की तरह ही रूसी डिजाइन का न्यूक्लियर प्लांट लगाया जाएगा। इस मौके पर हम आपको न्यूक्लियर रिएक्टर्स और उनके काम करने की प्रक्रिया के बारे में बताने जा रहे हैं।
न्यूक्लियर रिएक्टर
न्यूक्लियर रिएक्टर में नियंत्रित चेन रिएक्शन करवाकर (अणुओं को तोड़कर) गर्मी पैदा की जाती है। इसका इस्तेमाल बिजली बनाने में किया जाता है। दुनियाभर के ज्यादातर देशों में इस वक्त सेकंड जेनरेशन के न्यूक्लियर रिएक्टर्स इस्तेमाल किए जा रहे हैं। पुराने परंपरागत पावर हाउस में कोयला, गैस या फिर तेल के जरिए पानी खौलाकर भाप बनाने का काम किया जाता है, जबकि न्यूक्लियर रिएक्टर में यूरेनियम जैसे रेडियो एक्टिव पदार्थों के अणुओं को तोड़कर एक नियंत्रित चेन रिएक्शन शुरू करवाया जाता है।
रिएक्टर कैसे करते हैं काम
रिएक्टर में सबसे पहले संशोधित यूरेनियम की 12 फुट लंबी और आधे इंच मोटी छड़ों के बंडल बनाए जाते हैं, जिसे फ्यूल एसेंबली कहते हैं। इस फ्यूल एसेंबली को पानी से भरे 8 इंच मोटी स्टील की चादर से बने कंटेनर में डुबा दिया जाता है। इसी को रिएक्टर का कोर कहते हैं। इस वक्त परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने के लिए मुख्य रूप से दो रिएक्टर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें से एक टेक्नोलॉजी बॉयलिंग वाटर रिएक्टर और दूसरी प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर है।
आगे जानिए: बिजली बनाने की दोनों तकनीकों के बारे में।