न्यूयॉर्क. 84 साल बाद दूसरा भारतीय 'टाइम' मैगजीन का पर्सन ऑफ द ईयर बन सकता था। लेकिन इसकी उम्मीदें सोमवार को खत्म हो गईं। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी दौड़ से बाहर हो गए। वे टाइम पर्सन ऑफ द ईयर तो बने हैं, लेकिन सिर्फ रीडर्स पोल में। टाइम एडिटर्स पैनल ने अंतिम आठ की सूची जारी की है। इसमें मोदी का नाम नहीं है। इन्हीं आठ में से कोई एक 'पर्सन ऑफ द ईयर' बनेगा। एलान बुधवार को होगा।
इन आठ में होगा मुकाबला
- जैक मा, अलीबाबा के प्रमुख
- इबोला नर्सिंग स्टाफ,
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व्लादिमीर पुतिन, रूसी राष्ट्रपति
- टिम कुक,
एप्पल सीईओ
- फर्ग्युसन के प्रदर्शनकारी
- टेलर स्विफ्ट, गायिका
- रॉजर गुडेल, एनएफएल कमिश्नर
- मसूद बरजानी, कुर्दिश नेता
गांधी पहले भारतीय
महात्मा गांधी को 1930 में यह सम्मान मिला था। यह सम्मान पाने वाले वे पहले भारतीय थे। रीडर्स पोल के टॉप-10 में से सिर्फ तीन लोग अंतिम आठ में जगह बना पाए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा रीडर्स पोल में 11वें नंबर पर खिसक गए थे।
50 लाख वोट पड़े, मोदी को मिले 8.10 लाख
टाइम का ऑनलाइन रीडर्स पोल शनिवार आधी रात को खत्म हुआ था। इसमें मोदी विजेता हैं। कुल 50 लाख वोट पड़े। मोदी को मिले 8.10 लाख। अमेरिका से 18.50 लाख लोगों ने वोट किया, जबकि भारत से 8.50 लाख लोगों ने वोटिंग की। पोल में हांगकांग के छात्र जोशुआ वोंग और नोबेल विजेता मलाला यूसुफजाई भी टॉप-10 में थे। लेकिन एडिटर्स पैनल ने दोनों को बाहर कर दिया।
आखिरी फैसला एडिटर्स का
पर्सन ऑफ द ईयर उसे घोषित किया जाता है, जो सालभर अच्छी या बुरी वजह से सुर्खियों में रहा हो। इस पर अंतिम फैसला टाइम मैगजीन के संपादक ही करते हैं। लेकिन मैगजीन यह भी जानने की कोशिश करती है कि रीडर्स किसे सम्मान देना चाहते हैं। इसके लिए 1998 से ऑनलाइन पोलिंग शुरू की गई थी। मोदी अंतिम आठ में क्यों नहीं हैं, टाइम ने इसकी वजह नहीं बताई है।