(फोटो: स्कॉटिश लोग ब्रिटेन से अलग होने के लिए यस कैम्पेन चला रहे हैं।)
ब्रसेल्स। स्कॉटलैंड अगर ब्रिटेन से अलग हो जाता है तो उसे यूरोपीय संघ (ईयू ) की सदस्यता नहीं मिल सकेगी। वह 28 यूरोपीय देशों के ताकतवर समूह से बाहर ही रहेगा।
दरअसल, इंग्लैंड, वेल्स और स्कॉटलैंड को मिलाकर ग्रेट ब्रिटेन बनता है। इसमें से स्कॉटलैंड को अलग किए जाने के लिए 18 सितंबर को जनमत संग्रह है। अगर जनता अलग होने के पक्ष में गई तो 50 लाख लोग ब्रिटेन के साथ ही ईयू से बाहर हो जाएंगे। इस संबंध में ईयू के अध्यक्ष जोस मैनुअल बरोसो ने कहा है कि स्कॉटलैंड के लिए ईयू की सदस्यता नामुमकिन हो सकती है। ऐसा नहीं भी हुआ, तब भी यह बेहद मुश्किल ही होगा।
बरोसो के बाद यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष बनने जा रहे हैं जीन क्लाड जंकर। उनका कहना है कि स्कॉटलैंड को यूरोपीय संघ में शामिल करने का स्पेन, बेल्जियम और इटली जैसे देश विरोध कर सकते हैं। क्योंकि ये देश स्कॉटलैंड का समर्थन कर अपने देश में भी अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देना चाहते।
यूरो या पाउंड, अब तक मुद्रा तय नहीं
स्कॉटलैंड की आजादी के समर्थक अभी तय नहीं कर पाए हैं कि नया देश बनने के बाद उसकी मुद्रा क्या होगी। एक धड़ा यूरो, जबकि दूसरा धड़ा पाउंड के पक्ष में है। बड़ा मुद्दा ब्रिटेन का कर्ज भी है। बंटवारे के साथ कर्ज भी बांटने की बात कही जा रही है। लेकिन आशंका है कि अगर स्कॉटलैंड अलग होता है तो क्या वह अगले कुछ सालों में कर्ज चुकाने की स्थिति में पाएगा।
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