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ग्रेट ब्रिटेन से अलग हो सकता है स्कॉटलैंड, भविष्य पर फैसला आज

7 वर्ष पहले
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फोटो: एडिनबर्ग में एक मतदान केंद्र से वोट देकर निकलती महिलाएं।
एडिनबर्ग। स्कॉटलैंड ग्रेट ब्रिटेन का हिस्सा रहेगा या अलग देश बनकर नक्शे पर उभरेगा, इसका फैसला यहां की 42 लाख जनता के हाथ में है। इसको लेकर यहां जनमत संग्रह हो रहा है। यह मत तय करेगा कि 300 साल तक ग्रेट ब्रिटेन का हिस्सा रहे स्कॉटलैंडवासियों के दिल में क्या है। बहरहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस जनमत संग्रह पर टिकी हुई हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ब्रिटेन की एकता का समर्थन किया है। उन्होंने स्कॉटलैंड की आजादी के लिए कराए जा रहे जनमत संग्रह पर असहमति जताई है। साथ ही ब्रिटेन को मजबूत रखने पर जोर दिया है। ओबामा ने कहा, "ब्रिटेन ने हमेशा से अच्छा काम किया है। लिहाजा, उसे एक बने रहना चाहिए।"
गौरतलब है कि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से अब तक दुनिया के 30 देशों को जनमत संग्रह के जरिए आजादी मिली है। हालांकि, इनमेंं से अधिकांश को बाद में गृहयुद्ध जैसे हालात झेलने पड़े। स्कॉटलैंड का हश्र क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल, जनता हां या ना में अपना मत दे रही है।
इससे पहले बुधवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन सहित कई बड़े नेताओं ने स्कॉटलैंड के लोगों को आजादी से होने वाले नुकसान के बारे में बताया था। लेकिन स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर (मुख्यमंत्री) एलेक्स सैलमंड आजादी के पक्ष में माहौल बनाए हुए हैं।
इस जनमत संग्रह के लिए 15 अक्टूबर 2012 को एडिनबरा में कैमरन और सैलमंड के बीच समझौता हुआ था। मार्च 2013 में इसके लिए 18 सितंबर, 2014 की तारीख तय हुई। इसका ब्योरा 26 नवंबर, 2013 को प्रकाशित हुआ। स्कॉटलैंड के लोगों को जीवनकाल में यह एक ही मौका मिलेगा।
स्कॉटलैंड के अलग देश बनने मामले को लेकर कराए गए सर्वेक्षणों के मुताबिक, 48 फीसदी ब्रिटेन के साथ बने रहना चाहते हैं, जबकि 42 फीसदी लोगों ने आजाद होने की बात कही है। गौरतलब है कि मतदान से एक घंटे पहले किए गए सर्वे के मुताबिक, डेढ़ लाख लोग ऐसे थे, जिन्होंने इस पर कोई भी निर्णय नहीं लिया था। नतीजा शुक्रवार सुबह दो बजे के करीब आना है।
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