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कंडोम के छोटे साइज से परेशान यु्गांडा के युवा, संसद में पहुंचा मामला

7 वर्ष पहले
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कंपाला। वर्तमान में जब दुनिया के अधिकांश हिस्से में युवा रोजगार और रोटी की जुगाड़ में व्यस्त हैं, वहीं युगांडा के युवक इन दिनों अजीबोगरीब चिंता से घिरे हुए हैं। यह चिंता है उनकी मनमर्जी की साइज के कंडोम न मिलने की। मामला इतना बड़ा है कि युगांडा की संसद में सांसदों ने कंडोम निर्माता कंपनियों पर आरोप लगाया है कि वो छोटे आकार के कंडोम बनाकर बेच रही हैं। इससे अफ्रीका खासकर युगांडा में एड्स (एचआईवी) की बीमारी से निपटने में दिक्कतें पेश आ सकती हैं।
सांसद टॉम एजा ने युगांडा की संसदीय समिति में बयान दिया कि उन्होंने देश के कुछ हिस्सों का दौरा किया और पाया कि एचआईवी वायरस कुछ खास लोगों को घेर रहा है। इन खास लोगों के जननांग काफी बड़े थे और उस पर कंडोम फिट नहीं आते। निर्माता कंपनियों को उनके लिए बड़े साइज के कंडोम बनाना चाहिए। कई बार सेक्स संबंध बनाते समय वह फट जाते हैं, जो एक गंभीर समस्या है।
वहीं, एक अन्य सांसद मेरार्ड बितेक्येरेजो ने बताया कि कुछ युवाओं ने शिकायत की है कि वर्तमान में उपलब्ध कंडोम उन्हें फिट नहीं आते हैं। कुछ तो बहुत ज्यादा छोटे होते हैं। एक अन्य समिति की सदस्य सारा नेतालिजिली कहती हैं कि साइज का मुद्दा हमारे लड़के-लड़कियों और तमाम कंडोम का इस्तेमाल करने वाले लोगों में एड्स जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
गौरतलब है कि पुरुष जननांग के साइज और कंडोम का मुद्दा पहले भी कई बार कई देशों में उठ चुका है। 2006 में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने पाया था कि मुंबई में 60 फीसदी पुरुषों के जननांग का साइज इंटरनेशनल कंडोम साइज से एक इंच कम है। करीब 30 फीसदी लोगों का दो इंच छोटा है। बीते सालों में एड्स की बीमारी में गिरावट दिखाई पड़ने के बाद युगांडा में फिर से इस घातक बीमारी ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। यहां हर साल एड्स से 80 हजार लोगों की मौत होती है। 1992 में यहां 18 फीसदी लोग इस जानलेवा बीमारी के शिकार थे। वहीं, कंडोम के इस्तेमाल के बाद 2005 तक आते-आते यह आंकड़ा 6.4 फीसदी तक सिमट गया था। लेकिन 2012 में 7.2 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो गई। वर्तमान में युगांडा में 18 लाख लोग एचआईवी ग्रस्त हैं। लाखों बच्चे मां-बाप के मारे जाने के बाद अनाथ हो जाते हैं।