सोची। विंटर ओलिंपिक के लिए बसाया गया रूस का सोची शहर साल भर में ही वीरान हो चुका है। एक साल पहले 3,22,167 करोड़ रुपए की लागत से बना ये ओलिंपिक पार्क सबसे महंगे गेम्स का गवाह बना था। इस ओलिंपिक पार्क को गेम्स के बाद शायद ही कभी इस्तेमाल किया गया। खेलकूद से जुड़ी कुछ प्रमुख जगहों पर अब लोगों के दोबारा जुटने की संभावना भी बहुत कम दिखाई दे रही है। स्थानीय मीडिया और पत्रकार एलेक्जेंडर वाल्वो ने इस ओलिंपिक प्रोजेक्ट पर मोटी रकम खर्च करने को लेकर सरकार की आलोचना की है।
वाल्वो ने सोची ओलिंपिक की ओपनिंग सेरेमनी के एक साल पूरा होने पर वहां की तस्वीरें पेश की हैं। वाल्वो के मुताबिक, सोची ओलिंपिक पार्क के लिए रूसी सरकार ने करोड़ों-अरबों रुपए खर्च कर दिए। वो भी उस वक्त जब यूक्रेन मसले को लेकर रूस को पश्चिमी देशों के तमाम प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। इन पाबंदियों के चलते रूस की आर्थिक स्थिति डगमगाई हुई थी।
7 फरवरी को विंटर ओलिंपिक को पूरे एक साल हो गए, लेकिन इतने वक्त में भी ये लोगों के लिए घूमने-फिरने की पसंदीदा जगह नहीं बन सका। कुछ टूरिस्ट यहां पहुंचे भी, लेकिन उन्हें ये देखना था कि आखिर करोड़ों-अरबों डॉलर की रकम गई कहां। वाल्वो द्वारा हाल ही में ली गई तस्वीरों में ओलिंपिक पार्क वीरान नजर आ रहा है। तमाम सुख-सुविधाओं के लैस ट्यूलिप इन होटल बिल्कुल खाली पड़ा है। वहीं, फिश्ट स्टेडियम की छत को आंशिक तौर पर बीच से खोल दिया गया है, जिसे दुरुस्त कराने में फिर पैसे खर्च होंगे।
वाल्वो का कहना है कि अगर इस पार्क को लेकर सरकार और लोगों का यही रुख रहा तो अगले एक साल में ये पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। इनमें से कुछ स्टेडियमों को निजी कंपनियों ने अपने अधिकार क्षेत्र में ले रखा है, लेकिन उन्होंने भी इसे इस्तेमाल नहीं किया। वाल्वो के मुताबिक, 2018 का फुटबॉल वर्ल्ड कप रूस में होना है। ऐसे में, फिर इनकी मरम्मत होगी। इसमें दोबारा करीब चार अरब रुपए का खर्च आएगा। ऐसे में, इसे म्यूजियम ऑफ करप्शन यानी भ्रष्टाचार का म्यूजियम कहना गलत नहीं होगा।
आगे देखिए: साल भर बाद वीरान पड़े सोची ओलिंपिक पार्क की फोटोज।