लंदन। सूरज के नजदीक जाने वाले किसी भी यान को राख होने से बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। ग्लोबल फेडरेशन ऑफ एनिमल सैंक्चुरी के वैज्ञानिक क्रिस ड्रेपर ने जानवरों की हड्डियों का इस्तेमाल करके इस चुनौती का जवाब ढूंढा है। उन्होंने टाइटेनियम की फाइल पर जानवरों की हड्डियों से बना एक लेप लगाया है जो सौर यान को जलने से बचाएगा।
यह यान 2017 में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा जो सूरज की कक्षा में उसके चारों ओर घूमेगा। यह किसी भी तारे के सबसे नज़दीक जाने वाला यान होगा। यह अंतरिक्ष यान सौर प्रणाली में छोड़े जाने वाले उच्च ऊर्जा वाले कणों का विस्तृत अध्ययन करेगा। यह केवल हमें सूरज के बारे में बेहतर जानकारी उपलब्ध कराएगा बल्कि हम यह भी जान पाएंगे कि पृथ्वी पर इसका कैसा असर होता है।
चुनौतियां भी थी
हीट शील्ड इतनी हल्की तो होना ही चाहिए कि वह रॉकेट को जमीन से ऊपर जाने में मदद करे और सूरज की गर्मी को वह अंतरिक्ष में पांच साल तक झेल सके। हीटशील्ड की बाहरी सतह पर खुले दरवाजे वाले छिद्र भी होने चाहिए ताकि यान में लगे उपकरण सूरज को देख सकें जिनका अध्ययन उनको करना है। ड्रेपर कहते हैं, "सारी चिंता यही थी कि हीटशील्ड बनाने के लिए हम ऐसा कौन सा पदार्थ इस्तेमाल करे जिससे हमारे उपकरण जले नहीं। साथ ही ये अधिक तापमान भी झेल सके।'
अगली स्लाइड में पढ़ें, कैसे काम करेगा यह लेप।
चीन ने लांग मार्च के जरिए उपग्रह भेजा
बीजिंग चीनके पुराने 'लॉन्ग मार्च' रॉकेट के उन्नत संस्करण के जरिए एक बहुद्देशीय उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया गया है। यह इस रॉकेट के जरिए किया गया 200वां प्रक्षेपण था। 'लॉन्ग मार्च-4बी' रॉकेट के जरिए 'सीबीईआरएस-4' को सफलता पूर्वक प्रक्षेपित करके इसे अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया गया है। 'सीबीईआरएस-4' को चीन और ब्राजील ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। यह 1988 में शुरू किए गए 'चाइनीज-ब्राजीलियन अर्थ रिसोर्सेज सेटेलाइट' (सीबीईआरएस) कार्यक्रम का पांचवां उपग्रह था। पहले उपग्रह 'सीबीईआरएस' का प्रक्षेपण अक्टूबर, 1999 में किया गया था।