गाजा सिटी। 'पापा, मैं आपसे क्या कहूं...अगर मैं कहूं कि मैं आपसे प्यार करता हूं, ये काफी नहीं होगा।' ये उस बच्चे की व्यथा है, जिसने
इजरायली हमले में अपने पिता को खो दिया। नौ साल की अजहर ने रुंधे गले से ये कविता पूरे क्लासरूम को सुनाई। 50 दिन चली भीषण तबाही के बाद सोमवार को गाजा पट्टी में शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर पटरी पर लौट आई। हालांकि, सुचारू तरीके से कब सरपट भागेगी, यह कह पाना जरा मुश्किल होगा।
गाजा सिटी की एक स्कूल टीचर रीमा अबू खतला कहती हैं, "कुछ बच्चों की कहानियों ने हमें हंसाया, तो कुछ ने आंखें नम कर दीं।" उन्होंने कहा, "हम कोशिश कर रहे हैं कि बच्चे उन खौफनाक पलों को एक बुरा सपना समझ कर भुला दें।" पढ़ाई शुरू करने से पहले छात्रों ने उन बच्चों के लिए प्रार्थना की, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, विध्वंसक युद्ध में लगभग 500 मासूमों की जानें चली गईं।
इजरायली हमलों में गाजा पट्टी के 200 से ज्यादा स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं। एक अनुमानित आंकड़े के मुताबिक, गाजा में कम से कम 244 स्कूल (जिसमें 141 सरकारी स्कूल हैं), संयुक्त राष्ट्र के 75 स्कूल, चार निजी स्कूल, 25 किंडर गार्टन, छह यूनिवर्सिटी और पांच कॉलेजों को हवाई हमले व गोलीबारी से काफी नुकसान पहुंचा है।
यूनाइटेड नेशन ऑफिस फॉर द कोआर्डिनेशन ऑफ ह्यूमैनिटैरियन अफेयर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 50वें दिन तक मरने वाले फलस्तीनी नागरिकों की संख्या 2,140 थी, जिसमें 1,454 नागरिक शामिल हैं। फलस्तीनी सामाजिक मामलों के मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 2,000 बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने मां-बाप में से किसी एक या फिर दोनों को खो दिया है।"
आगे तस्वीरों में देखें, गाजा में स्कूलों के ताजा हालात...