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आज भी नाजी दौर की खूनी खामोशी पसरी है यहां

8 वर्ष पहले
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ट्रेबलिंका. यहां पहुंचते ही जिंदगी थरथराने लगती है। एक अज्ञात भय हमें घेर लेता है। ट्रेबलिंका में आज भी खूनी खामोशी पसरी हुई है। बेचैनी और छटपटाहट यहां की फिजां में इस कदर घुली है कि हवा का एक झोंका भी भीतर तक हिला देता है। यह द्वितीय विश्वयुद्ध का नाजी यातना शिविर है जो अब स्मारक है। यह वही संहार शिविर है जहां नाजियों ने 8.70 लाख यहूदियों को मौत के घाट उतारा था। इनमें दुधमुंहे बच्चे, बूढ़े और महिलाएं भी बड़ी तादाद में थे। इन्हें हिटलर के ऑपरेशन रेनहार्ड के तहत गैस चैंबरों में मार डाला गया।

ट्रेबलिंका पोलैंड की राजधानी वारसॉ से तकरीबन 80 किमी उत्तर-पूर्व का एक गांव है। यह ऑपरेशन रेनहार्ड के तहत बने तीन कैंपों में से एक था। इससे कुछ किलोमीटर दूर घने जंगलों में नाजियों ने एक गुप्त कैंप बनाया था। यह कैंप आधिकारिक तौर पर जुलाई, 1942 से अक्टूबर, 1943 के बीच ऑपरेशनल रहा।

इस घटना में मारे गए लोगों की याद में इंटरनेशनल होलोकॉस्ट रिमेम्बरेंस डे 27 जनवरी को मनाया जाएगा। चलिए हम आपको दूसरे विश्‍वयुद्ध के दौरान घटे इस वाकये से जुड़े कुछ फैक्‍टस बताते हैं। जानने के लिए आगे की स्‍लाइड्स पर क्लिक करें।