धमाकों के बीच पाकिस्तान की आवाम मुल्क की किस्मत का फैसला कर रही है। डॉन न्यूज के हवाले से खबर है कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में महिलाओं को वोट न डालने के लिए सीकेट्र डील हो चुकी है।
पाकिस्तान में महिलाओं को वोट न डालने देने देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा सकता है। याद रहे बेनजीर भुट्टो देश की पहली महिला प्रधानमंत्री रह चुकी हैं। इसके अलावा किसी भी मुस्लिम देश की पहली शीर्ष नेता थीं। 2007 में रावलपिंडी की रैली में चली गोलियों ने पाकिस्तान की इस आवाज हमेशा के लिए खामोश कर दिया था। वे 54 साल की थीं।
पाकिस्तान के सबसे बड़े राजनीतिक घराने भुट्टो परिवार में जन्मी बेनजीर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी थीं। वे 1988-90 और 1993-96 में दो बार प्रधानमंत्री बनीं। 2007 में फौजी ताकत जब दम तोड़ रही थी और लोग लोकतंत्र के लिए आवाज उठा रहे थे, तब मोहतरमा बेनजीर भुट्टो अपने नौ साल का निर्वासन काट देश लौटी थी।
मुशर्रफ सरकार ने उन्हें वापसी की इजाजत तो दी, लेकिन उन पर जानलेवा हमले की चेतावनी भी दे दी थी। बेनजीर ने दुबई से कराची की फ्लाइट लेते समय कहा था, मुझे लगता है कि सबसे बड़ी सुरक्षा खुदा की है और खुदा ने चाहा तो सब कुछ ठीक होगा...
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