वॉशिंगटन/रक्का। सीरिया में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ अमेरिका और उसके सहयोगी अरब देशों के हवाई हमले जारी हैं। तीसरे दिन आतंकी संगठन के कब्जे वाली ऑयल रिफायनरीज पर हमले किए गए। उत्तरी सीरिया में अमेरिका, सऊदी अरब और यूएई के एयरक्राफ्ट्स के हमलों में 14 आतंकियों और पांच नागरिकों की मारे जाने की खबर है।
अमेरिका ने बताया कि इन ऑयल रिफायनरीज से आईएस को रोज दो मिलियन डॉलर (12 करोड़ रुपए) की कमाई होती है। आईएस ने सीरिया और
इराक की कई ऑयल रिफायनरीज पर कब्जा जमाया है। वह क्रूड ऑयल की तस्करी करके पैसा कमा रहे हैं। अमेरिकी सेना ने कहा है कि ऑयल रिफायनरिज पर फाइटर जेट्स और ड्रोन से नए हवाई हमले किए गए हैं। यहां से हर दिन 300-500 बैरल रिफाइंड पेट्रोलियम का उत्पादन किया जा रहा है।
उधर, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ओबामा ने एक फिर इस्लामिक स्टेट के खात्मे की कसम खाई है। आईएस के कब्जे में
इराक और सीरिया के लिए इलाके हैं। कब्जे छुड़ाने के लिए अमेरिका ने अगस्त में इराक में 200 के करीब हवाई हमले किए थे। बीते सोमवार से सीरिया में भी हवाई हमले किए गए हैं।
यूएन सिक्युरिटी काउंसिल में शुक्रवार से इराक और सीरिया में आईएस के साथ मिलकर लड़ने वाले जिहादियों को रोकने के लिए सभी देशों द्वारा एक बाध्यकारी प्रस्ताव अपनाया जाएगा।
बराक ओबामा ने सभी राष्ट्रों को विदेशी लड़ाकों की भर्ती और आर्थिक सहयोग को रोकने के लिए कहा है।
ब्रिटेन भी देगा अमेरिका का साथ
संयुक्त राष्ट्र में बुधवार को ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन ने बताया कि इराक में अमेरिकी हवाई हमले में साथ देने के लिए ब्रिटिश संसद को मंजूरी देनी चाहिए। वह इसके लिए शुक्रवार को बैठक बुलाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को कार्रवाई के नए चरण के लिए कदम उठाना चाहिए। कैमरन ने यूएन के 193 सदस्यों को यह जानकारी दी।
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