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साउथ चाइना सी पर आज आ सकता है अहम फैसला, फिलीपींस ने किया था चीन को चैलेंज

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2016, 01:10 PM IST

फिलीपींस का आरोप है कि स्ट्रैटजिकली अहम माने जाने वाले इस इलाके में चीन ने रिसोर्सेस का जरूरत से ज्यादा दोहन किया है।

फिलीपींस का कहना है कि चीन साउथ चाइना सी के 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर चुका है। (फाइल) फिलीपींस का कहना है कि चीन साउथ चाइना सी के 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर चुका है। (फाइल)
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एम्सटर्डम. न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत की दावेदारी रोकने वाला चीन साउथ चाइना सी पर अपना हक जताने की लड़ाई हार गया। हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने मंगलवार को कहा कि इस इलाके पर चीन का कोई ऐतिहासिक हक नहीं है। जबकि चीन यहां के 90% हिस्से पर अपना दावा करता रहा है। इस केस में पिटीशन लगाने वाले फिलीपींस का आरोप था कि स्ट्रैटजिकली अहम माने जाने वाले इस इलाके में चीन ने रिसोर्सेस का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया है। हालांकि, चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है। इस पर अमेरिका का कहना है कि इंटरनेशनल कोर्ट का फैसला फाइनल है और चीन को इसे मानना ही होगा। हेग ट्रिब्यूनल ने ये कहा...
- 'चीन का ये दावा करना कि साउथ चाइना सी पर उसका ऐतिहासिक हक है, कतई सही नहीं कहा जा सकता।'
- 'चीन ने आइलैंड के स्कारबरो शोल (उथले पानी)-स्प्रैटली आइलैंड ग्रुप पर फिलीपींस के फिशिंग राइट्स में बाधा डाली।'
- 'चीन को स्प्रैटली आइलैंड पर एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन बनाने का भी कोई हक नहीं।'
इसलिए बढ़ा साउथ चाइना सी में तनाव
- चीन ने धीरे-धीरे साउथ चाइना सी पर अपना कब्जा कर लिया था।
- उसने वहां न केवल आर्टिफिशियल आइलैंड बना लिया, बल्कि बड़ी तादाद में आर्मी डिप्लॉय की। वहां हवाई पट्टी भी बना ली।
- चीन के साउथ चाइना सी में दबदबे को लेकर अमेरिका भी लगातार विरोध करता रहा है।
- बता दें कि चीन और अमेरिका दोनों ही साउथ चाइना सी में लगातार एक्सरसाइज करते रहते हैं।
फिलीपींस ने 2013 में दायर किया केस
- फिलीपींस ने 2013 में इंटरनेशनल कोर्ट में चीन के खिलाफ केस दायर किया था।
- फिलीपींस ने अपने 15 प्वाइंट्स में चीन के साउथ चाइना सी में स्टेटस पर सवाल उठाए थे।
- फिलीपींस ने कहा था कि चीन ने स्कारबरो शोल और स्प्रैटली आइलैंड ग्रुप में उसके राइट्स को नुकसान पहुंचाया था।
- चीन, साउथ चाइना सी में अपने कब्जे को 'नाइन-डैश लाइन' बताता है।
- फिलीपींस का दावा है कि बीते 69 साल से चीन का साउथ चाइना सी के 85% हिस्से पर कब्जा हो चुका है।
कोर्ट ने इस आधार पर सुनाया फैसला
- इंटरनेशनल कोर्ट ने अपने फैसले में यूएन कन्वेंशन ऑन लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) को आधार बनाया।
- 1982 में बने UNCLOS के मुताबिक, कोई भी देश अपनी टेरिटोरियल सोवेरिनटी बरकरार रखते हुए सामुद्री सीमा के अंदर एक्टिविटी कर सकता है।
- UNCLOS के मुताबिक, आइलैंड में 12 नॉटिकल माइल की रेडियस में कोई भी देश अपनी एक्टिविटीज रख सकता है।
- फिलीपींस ने सुनवाई में कहा था कि एक्स्ट्रा 200 नॉटिकल माइल तक फिशिंग या दूसरी गतिविधियों की परमीशन दी जानी चाहिए।
चीन के फैसला न मानने पर क्या होगा?
- ये पहली बार होगा जब साउथ चाइना सी के मुद्दे पर कोई लीगल एक्शन सामने आया है।
- साउथ चाइना सी के विवादित हिस्से पर चीन के अलावा 5 देश अपना-अपना दावा पेश करते रहे हैं।
- जाहिर है फैसले का असर 3.5 मिलियन स्क्वेयर एरिया में फैले साउथ चाइना सी में चीन के कब्जे पर पड़ेगा।
चीनी सरकारी मीडिया ने क्या कहा?
- ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, 'चीन उकसावे पर ही अपना कोई रिएक्शन देगा।'
- 'हालांकि, वहां किसी मिलिट्री ऑपरेशन नही होने जा रहा लेकिन सभी उसकी तैयारी जरूर कर रहे हैं।'
- कहा जा रहा है कि नेवी रिजर्व्स को यहां 10 से 22 जुलाई तक के मिशन पर बुलाया गया है।
- चीन ने यहां कुछ समय पहले सेलर्स और ऑफिसर्स को ट्रेनिंग शुरू की है। जिसे बंद करने के लिए उसे समन दिया गया है।
कॉन्ट्रोवर्शियल आइलैंड पर करवा चुका है मिलिट्री प्लेन की लैंडिंग
- चीन ने अप्रैल में पहली बार साउथ चाइना सी के कॉन्ट्रोवर्शियल आइलैंड पर मिलिट्री एयरक्राफ्ट की लैंडिंग कराई। इंटरनेशनल कम्युनिटी को डर है कि चीन इस आइलैंड को फाइटर जेट का बेस बना सकता है।
- बता दें कि साउथ चाइना सी में इस आर्टिफिशियल आइलैंड बनाने का यूएस विरोध करता रहा है।
- अमेरिका निगरानी के लिए कई बार अपनी वॉरशिप यहां भेज चुका है। इसके कारण दोनों देश कई बार आमने-सामने हो चुके हैं।
क्या है विवाद की असल वजह?
- साउथ चाइना सी का लगभग 35 लाख स्क्वायर किलोमीटर का एरिया विवादित है।
- इस पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई दावा करते रहे हैं।
- साउथ चाइना सी में तेल और गैस के बड़े भंडार दबे हुए हैं।
- अमेरिका के मुताबिक, इस इलाके में 213 अरब बैरल तेल और 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है।
- वियतनाम इस इलाके में भारत को तेल खोजने की कोशिशों में शामिल होने का न्योता दे चुका है।
- इस समुद्री रास्ते से हर साल 7 ट्रिलियन डॉलर का बिजनेस होता है।
- चीन ने 2013 के आखिर में एक बड़ा प्रोजेक्ट चलाकर पानी में डूबे रीफ एरिया को आर्टिफिशियल आइलैंड में बदल दिया।
- अमेरिका और चीन एक दूसरे पर इस क्षेत्र को “मिलिटराइजिंग’ (सैन्यीकरण) करने का आरोप लगाते रहे हैं।
इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले की स्टडी कर रहा है भारत
- भारत यूएन की अगुवाई वाले ट्रिब्यूनल के मंगलवार को आए फैसले की स्टडी कर रहा है।
- इस मसले पर जब भारत का रिएक्शन पूछा गया तो सरकार के एक सीनियर ऑफिसर ने यह जानकारी दी।
- भारत की बेचैनी बढ़ी हुई है, क्योंकि भारत मानता है कि चीन जो साउथ चाइना सी में कर रहा है, वही वह चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) में भी कर रहा है।
- इस कॉरिडोर के बीच में आने वाले इलाके पर भारत अपना दावा करता है।
क्या है फ्रीडम ऑफ नेविगेशन?
- इंटरनेशनल लॉ किसी भी देश को उनकी समुद्री सीमा से 12 नॉटिकल माइल तक के क्षेत्र में जाने का हक देता है।
- उसके बाद इंटरनेशनल बॉर्डर का एरिया शुरू हो जाता है।
- कोई भी देश इस सीमा के बाहर किसी एरिया पर दावा नहीं कर सकता।

वियतनाम, ब्रुनेई, मलेशिया जैसे देश भी वहां अपना अधिकार जताते हैं। (फाइल) वियतनाम, ब्रुनेई, मलेशिया जैसे देश भी वहां अपना अधिकार जताते हैं। (फाइल)
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चीन ने ये कहते हुए इंटरनेशनल कोर्ट की सुनवाई में हिस्सा नहीं लिया कि ये मामला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। (फाइल) चीन ने ये कहते हुए इंटरनेशनल कोर्ट की सुनवाई में हिस्सा नहीं लिया कि ये मामला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। (फाइल)
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फिलीपींस का कहना है कि चीन साउथ चाइना सी के 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर चुका है। (फाइल)फिलीपींस का कहना है कि चीन साउथ चाइना सी के 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर चुका है। (फाइल)
वियतनाम, ब्रुनेई, मलेशिया जैसे देश भी वहां अपना अधिकार जताते हैं। (फाइल)वियतनाम, ब्रुनेई, मलेशिया जैसे देश भी वहां अपना अधिकार जताते हैं। (फाइल)
चीन ने ये कहते हुए इंटरनेशनल कोर्ट की सुनवाई में हिस्सा नहीं लिया कि ये मामला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। (फाइल)चीन ने ये कहते हुए इंटरनेशनल कोर्ट की सुनवाई में हिस्सा नहीं लिया कि ये मामला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। (फाइल)
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