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स्टेशन बाहर से तो झक्कास... अंदर बिलकुल बकवास

6 वर्ष पहले
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बोकारो। बोकारो रेलवे स्टेशन आज भी कई तरह की बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। इस वजह से यहां आने वाले यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक तरफ तो स्टेशन को स्वच्छ रखने के कई लंबे-चौड़े वायदे किए जाते हैं पर स्टेशन को स्वच्छ रखने के लिए उसकी व्यवस्था भी होनी चाहिए।
इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि आद्रा मंडल को सर्वाधिक राजस्व देने वाला यह स्टेशन आज भी कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। शौचालय, पेयजल और चिकित्सा समस्या आज भी बरकरार है।

आधा किमी दूर है रेलवे का पुराना अस्पताल

पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री ममता बनर्जी ने सभी ग्रेड स्टेशन के समीप ही अस्पताल खोलने की घोषणा की थी पर ग्रेड स्टेशन होने के बाद भी आज तक स्टेशन में अस्पताल नहीं खुल सका है। ऐसे में आपात स्थिति में यहां के मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है। चूंकि वहां से आधा किलोमीटर दूर बने रेलवे अस्पताल में मरीजों के लिए सिर्फ फर्स्ट एड की ही व्यवस्था है।

पेयजल की समस्या भी है बरकरार

गर्मी के मौसम में प्लेटफॉर्म नंबर दो और तीन पर पेयजल की समस्या शुरू हो जाती है। इस वजह से बाहर से आने या प्लेटफॉर्म पर खड़े रहने वाले यात्रियों को ठंडे पेयजल के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

फुटओवर ब्रिज अब तक नहीं बना

एकनंबर से दो-तीन नंबर प्लेटफॉर्म पर तो फुटओवर ब्रिज के सहारे भी जाते हैं। पर दो-तीन नंबर प्लेटफॉर्म से रेलवे यार्ड में जाने के लिए रेलवे कर्मचारी, ड्राइवर अाैर गार्ड को रेल लाइन पार करके ही जाना पड़ता है। ऐसे में कई बार कर्मी दुर्घटना के शिकार भी हो चुके हैं।
इस प्लेटफॉर्म पर लगभग डेढ़ वर्ष पहले एक फुटओवर ब्रिज बनाने का काम शुरू किया गया था पर यह ब्रिज आज डेढ़ वर्ष बाद भी अधूरा पड़ा है। एक पुराना फुटओवर ब्रिज बनाया भी गया था तो वह चालू ही नहीं हो पाया और वह जर्जर भी हो गया।

प्लेटफॉर्म नंबर दो और तीन पर एक भी शौचालय नहीं है। इस वजह से यात्रियों खासकर महिलाओं को काफी परेशानी होती है। एक नंबर में एक शौचालय है भी तो बगैर पैसे के उसक उपयोग ही नहीं कर सकते। परेशानी तब होती है जब ट्रेन दो नंबर और तीन नंबर पर आने वाली होती है और यात्री को टॉयलेट यूज करने के लिए एक नंबर पर आना पड़ता है। ऐसे में ट्रेन के छूट जाने का डर बना रहता है।

रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य संजय वैद से सीधी बात

स्टेशन पर पेयजल की समय्सा दूर करने के क्या उपाय किए हैं?

दो और तीन नंबर में ठंडे पेयजल के लिए दो वर्ष पूर्व प्रस्ताव दिया गया था पर आज तक उस प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी गई। गर्मी में तो ठंडे पेयजल की छोड़िए, कभी-कभी तो साधारण पानी भी यात्रियों को नसीब नहीं होता है।

क्या आपने कभी अस्पताल की मांग की है?

इसके लिए भी मांग पत्र दिया था, उन्हीं लोगों से पूछिए कि उस पर क्या कार्रवाई की गई है? पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री ममता बनर्जी ने सभी ग्रेड स्टेशन में अस्पताल बनाने की घोषणा की थी, उसी समय सलाहकार समिति की बैठक में इस समस्या को भी उठाया था पर अस्पताल का निर्माण तो दूर आज तक स्थान भी चयन नहीं किया जा सका है।

प्लेटफॉर्म नंबर एक और दो पर शौचालय क्यों नहीं है?

यही तो कमाल है आद्रा मंडल के अधिकारियों का। उन्हें पता तक नहीं है कि ग्रेड स्टेशन के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं जरूरी हैं। अब देखिए ना पूरे स्टेशन में दूर-दूर तक फोन बूथ का पता ही नहीं है पर प्लेटफॉर्म नंबर दो पर इसकी सुविधा उपलब्ध होने की सूची टंगी हुई है।

फुट ओवरब्रिज के बारे में आपने कभी सवाल उठाया?

प्लेटफॉर्म की संख्या सात तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया था। इसे मंजूरी मिलती तो बनने के बाद खुद खुद रेलवे यार्ड में जाने के लिए फुटओवर बन जाता। पर आज तक आद्रा मंडल के आला अधिकारियों ने कभी इस पर पहल ही नहीं की।

सभी समस्याओं से संबंधित बोकारो चैंबर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज, लायंस क्लब के अलावा जितनी भी स्वयंसेवी संस्थाओं के मांग पत्र मिले हैं उन्हें आद्रा मंडल के आला अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया है। यहां पर सुविधा उपलब्ध कराना उनकी ही जिम्मेवारी है।’’ एकेमिश्रा, स्टेशन प्रबंधक, बोकारो स्टील सिटी

डेढ़ वर्ष में भी नहीं बना यार्ड में जाने के लिए फुटओवर ब्रिज।