शैव गोस्वामी समाज का समारोह हुआ
शैवगोस्वामी समाज का वार्षिक सम्मेलन सिटी पार्क स्थित वनभोज स्थल में सम्पन्न हुआ जिसमें झारखंड के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियोें ने हिस्सा लिया। शैव गोस्वामी समाज के अध्यक्ष सुन्दर गोस्वामी ने कहा कि हमें सभी एकादश गोस्वामी संप्रदाय को एकजुट होकर अपने सामुदायिक एकता का परिचय देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी जाति को कहीं सामान्य वर्ग में रखा गया है तो कहीं ओबीसी में। झारखंड राज्य में पिछड़ी जाति की अनुसूची दो के क्रमांक 11 में दर्ज जाति जोगी के प्रकोष्ठ में ’गोसाई’ को समावेशित किया गया है। खोरठा साहित्यकार मनपूरन गोस्वामी ने कहा कि जनेउ पहनने के और चोटी रखने से ही कोई ब्राह्मण नहीं हो जाता। उसी प्रकार गोस्वामी को पिछड़ी जाति घोषित किये जाने से उसके सामाजिक मान-सम्मान में कहीं कोई कमी नहीं आएगी। बल्कि आरक्षण के लाभ से युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। आज समाज में धनाढ्य और शोषक समुदाय अपने को आदिवासी घोषित करने की मांग कर रहा है वहीं सचमुच का पिछड़ा समुदाय होने के बावजूद केवल टिका-चोटी रखने के कारण अगड़ी जाति में गिनना न्यायोचित नहीं है। समाज में सभी जाति समुदाय की अपनी विशिष्ट पहचान होती है। अपने पहचान के साथ समाज की मुख्यधारा में भागीदार होने की आवश्यकता है। जितेन्द्र नाथ गोस्वामी उर्फ मणिलाल ’मणि’ ने शैव गोस्वामी समाज के प्रतिक चिह्न के रूप में भगवा ध्वज में साँढ़ को रखने की बात कही। इस सम्मेलन में दर्जनों प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। इसमें मुख्य रूप से डाॅ. महेन्द्र नाथ गोस्वामी, डाॅ. पुर्णेदू गोस्वामी, सरयू प्रसाद गोस्वामी, दशरथ आदि मौजूद थे।