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जाम से मुक्ति मिलने में अभी समय लगेगा चास वासियों को

7 वर्ष पहले
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> गरगा पुल निर्माण का कार्य धीमा

> कभी बारिश तो कभी तकनीकी कारणों से रूक जाता है पुल निर्माण

> समय पर पुल निर्माण पूरा होना संभव नहीं

राजेशसिंह देव|बोकारो

पुरानासंकीर्ण गरगा पुल के कारण चास बोकारो के लोग हर दिन जाम को झेलते हैं। इससे मुक्ति के लिए केंद्र सरकार ने नए पुल निर्माण की स्वीकृति दी। लेकिन चार साल हो जाने के बाद भी चार स्लैब की ढलाई नहीं हुई। कभी बारिश तो कभी तकनीकी दिक्कत बताकर संवेदक और विभाग अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। गरगा पुल निर्माण में हो रही देरी के कारण चास वासियों को जाम से मुक्ति नहीं मिल रही है। यही हाल रहा तो तय समय पर पुल निर्माण का कार्य पूरा होना असंभव है और चास वासियों को जाम से मुक्ति मिलने में अभी समय लगेगा।

क्यों लटका गरगा पुल निर्माण

26अक्टूबर 2010 को केंद्रीय सड़क मंत्रालय ने एचएससीएल को 3.58 करोड़ की लागत से बनने वाले गरगा पुल निर्माण का कार्य दिया। कार्य में लापरवाही और धीमी गति का आरोप लगाते हुए एनएचआई ने 24 जनवरी 2013 को एग्रीमेंट रद्द कर दिया। इसके बाद एचएससीएल ने न्यायालय में केस कर दिया। 14 माह तक पुल निर्माण लटके रहने के बाद में समझौता होने पर पुन: एचएससीएल को कार्य आवंटित किया गया। इस दौरान पुल निर्माण की राशि 3.58 करोड़ से बढ़ाकर 5.39 करोड़ की गई। पुल निर्माण के लिए संवेदक को 19 मार्च 2015 तक का समय दिया गया। लेकिन कार्य करने की जो रफ्तार है उससे स्पष्ट दिखता है कि मार्च तक यह कार्य पूर्ण होना असंभव है।

जुलाईमें करनी थी तीसरे स्लैब की ढलाई

नएपुल में छह पीलर और दो अबार्टमेंट में ढलाई करनी है। इनमें दो स्लैब की ढलाई हो चुकी है। तीसरे स्लैब की ढलाई जुलाई में और चौथे की अगस्त में करनी थी, लेकिन सितंबर माह में भी इन स्लैबों की ढलाई नहीं हो पाई है। दो स्लैब ढलाई के बाद काम लगभग बंद पड़ा हुआ है। इसके पीछे बारिश और नदी में डैम का पानी छोड़े जाने के अलावा विभाग द्वारा तय किए गए मापदंड का छड़ बाजार में नहीं मिलने को कारण बताया जा रहा है।

निर्माणाधीन गरगा पुल।

विभागीय बैठक में लगा एक दूसरे पर आरोप|पिछले दिनोंधनबाद में एनएचआई के कार्यालय में पुल निर्माण को लेकर बैठक हुई। उसमें विभागीय अधिकारियों ने पुल निर्माण में देरी के लिए संवेदक पर आरोप लगाते हुए कहा कि इससे लोगों में आक्रोश पनप रहा है। जबकि एचएससीएल केअधिकारियों