प्रगणकों को अभी तक नहीं मिला है मानदेय
जिलेमें चले सामाजिक आर्थिक गणना में शामिल प्रगणकों को अभी तक मानदेय नहीं मिला है। जबकि प्रगणकों से वित्तीय वर्ष 2011-12 में ही काम कराया गया है। मानदेय नहीं मिलने से प्रगणक प्रतिदिन चास प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाते हैं। परन्तु कोई फायदा नहीं हो रहा है। प्रगणकों को यह कहकर वापस कर दिया जाता है कि अभी राशि का आवंटन नहीं हुआ है। इससे प्रगणकों में रोष बढ़ता जा रहा है। प्रगणकों का कहना है कि दो वर्ष बीत जाने के बाद भी मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। इससे सब्र का बांध टूटता जा रहा है।
राशि नहीं रहने की करते हैं बात
पारा शिक्षक राजकिशोर सिंह ने बताया कि उन्होंने मानदेय भुगतान की मांग को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी को आवेदन भी दिया था। परन्तु कोई फायदा नहीं हुआ। सामाजिक आर्थिक गणना 2011-12 में कराई गई। इसमें उन्हें प्रगणक बनाया गया। जिसका ब्लाक नंबर 0277 गिरिधरटांड़, 0278(1), कुरमा 0278(11) है। इसमें इन्हें प्रगणक का कार्य िदया गया था। उन्होंने बताया कि बीडीओ से मिलने पर वे प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी के पास भेज देते हैं। उनसे मिलने पर कहते हैं अभी तक राशि नहीं आई है। इसलिए भुगतान नहीं हो रहा है।
अभीतक पूर्ण नहीं हुआ है जाति गणना कार्य
राज्यसरकार द्वारा संसाधन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद सामाजिक, आर्थिक एवं जाति गणना कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। जबकि राज्य सरकार ने 31 दिसंबर 2011 तक इस गणना को पूर्ण करने का निर्देश दिया था। यही कारण है इसका नाम सामाजिक आर्थिक एवं जाति गणना 2011 रखा गया था। जिला प्रशासन को संसाधन उपलब्ध कराने के बाद भी यहां के अधिकारी और कर्मियों में इसके प्रति रुचि नहीं दिख रही है।
पाराशिक्षकों को मिला था प्रगणक का काम
सामाजिकआर्थिक एवं जाति गणना के लिए जिले के सभी पारा शिक्षकों को प्रगणक का कार्य मिला था। इसके लिए इन्हें अलग से प्रशिक्षण दिया गया था। वहीं इन्हें ई-कंप्यूटर के माध्यम से लोगों की गणना करनी थी। पारा शिक्षकों ने घर-घर जाकर आपकी जाति क्या है, मासिक आय कितनी है, आय के मुख्य स्रोत क्या हैं आदि की जानकारी इंट्री की है।