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कोयले के अभाव में फिर बंद होने के कगार पर डीवीसी पावर प्लांट

7 वर्ष पहले
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630मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता वाली डीवीसी की बोकारो थर्मल पवार प्लांट कोयले के अभाव में एक बार फिर बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। बी प्लांट की तीनों यूनिटों में से तीन नंबर यूनिट तो कोयले के अभाव में पहले से बंद है और अब बाकी बची दोनों यूनिटों में से चालू एक और यूनिट को भी बंद करने का निर्णय स्थानीय डीवीसी प्रबंधन ने ले लिया है, क्योंकि डीवीसी के कॉल स्टॉक में सिर्फ 8 हजार टन कोयला ही शेष बचा हुआ है। सिर्फ एक यूनिट को चालू रखने में प्रतिदिन तीन हजार टन कोयले की खपत होती है। फिलहाल डीवीसी के इस बी प्लांट की दो यूनिटों से विद्युत उत्पादन हो रहा है जिसे चालू रखने के लिए प्रतिदिन 6 हजार टन कोयले की जरूरत है। एक नंबर यूनिट से 140 मेगावाट एवं दो नंबर यूनिट से 135 मेगावाट विद्युत का उत्पादन हो रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी

इससंबंध में बी प्लांट के मुख्य अभियंता जेपी सिंह ने कहा कि प्लांट में कोयला का स्टॉक मात्र 8 हजार टन ही बचा है। इस कारण एक और यूनिट को कोयले के अभाव में बंद करने का निर्णय लिया गया था। वहीं मुख्यालय के वरीय पदाधिकारियों ने यूनिट बंद करने के बजाय विद्युत उत्पादन का लोड घटाने का निर्देश दिया ताकि कोयले की खपत कम हो, फिलहाल डीवीसी के स्टॉक में सिर्फ दो दिनों का ही कोयला बचा हुआ है। सीसीएल के कोलियरियों से कोयला आने की रफ्तार काफी धीमी है। कोयला आपूर्ति रेलवे रैक से होती है, परंतु एक रैक कोयला 13 से 14 घंटा में आता है। नक्सली बंदी के कारण डंपरों द्वारा सड़क मार्ग से रहा कोयला भी बंद है जिस कारण परेशानी बढ़ गई है।

बीटीपीएस प्लांट की तस्वीर।