(पूछताछ के लिए हवलदार को ले जाती पुलिस।)
बोकारो। कोर्ट हाजत से भागने वाले दोनों कैदियों का पूर्व में भी जेल से भागने का इतिहास रहा है। 20 अगस्त 2007 में बबलू चौधरी चास जेल से भागा था। उस समय चास जेल से भागनेवालों में बबलू चौधरी के अलावा लखी शर्मा उर्फ प्रवीण शर्मा, ताहिर अंसारी, विश्वजीत उर्फ मुन्ना, बबलू उर्फ रौशन प्रताप सुरेश कुमार के भी नाम शामिल हैं। फिलहाल बबलू चौधरी लोहा व्यवसायी सुरेश टेकरीवाल हत्याकांड में जेल में बंद था।
पुलिस की टीम ने उसे 31.07.2011 को धनबाद के केंदुआडीह से पकड़ा था। वर्ष 2004 से क्राइम की दुनिया में बबलू चौधरी आया था। वर्ष 2004 में चौधरी ने बेरमो में रोड डकैती किया था। बबलू चौधरी डकैती, लूट सुपारी किलर भी है। दर्जनों गंभीर मामलों का वह आरोपी है।
वर्ष 2008 में ओडि़शा के सम्बलपुर में एक ज्वेलरी दुकान में लगभग ढ़ाई करोड़ की लूट की घटना को अंजाम दिया था। इसके बाद 2010 में छत्तीसगढ़ के कोरबा में एटीएम लूट की घटना को अंजाम दिया था। वर्ष 2010 में उसने लोहा व्यवसायी सुरेश टेकरीवाल की हत्या इस्पात भवन जानेवाली सड़क पर की थी।
इसके गिरोह में 14 सदस्य हैं। झारखंड, बिहार, ओडि़शा, पश्चिम बंगाल में बबलू चौधरी की अच्छी पकड़ बतायी जाती है। यह अंतरप्रांतीय गिरोह का सरगना भी है। बोकारो, धनबाद, पुरुलिया और रांची में यह कई घटनाओं को अंजाम दे चुका है।
2007 में तेनुघाट जेल से भाग गया था सूदन
वर्ष2007 में सुदन सिंह तेनुघाट जेल से भाग गया था। तेनुघाट जेल से भागनेवालों में सूदन सिंह के अलावे महेंद्र सिंह, मनोज कुमार सिंह के भी नाम शामिल थे। इसे वर्ष 13 फरवरी 2014 को बालीडीह के ठेकेदार विनायक कुमार के घर पर 20 लाख रुपये की डकैती कांड में उसे गिरफ्तार किया गया था। इसे बालीडीह पुलिस ने जरीडीह थाना क्षेत्र के खूंटरी से गिरफ्तार किया था। जब वह अपनी प्रेमिका के घर में ठहरा हुआ था।
बबलू चौधरी टेकरीवाल हत्याकांड में और सुदन सिंह डकैती कांड का था मुख्य आरोपी।