बोकारो. जब-जब दिल्ली ने ठुकराया, तब तब बोकारो की जनता ने मुझे अपनाया है। यह दिल्ली और बोकारो के बीच सीधी लड़ाई है। हर बार जनता ने मुझे बिना मांगे दिया है, इस बार झोली फैलाकर वोट मांग रहे हैं, इस बार सामान्य जीत नहीं, ऐसी जीत चाहिए, जो दिल्ली को हिला दे। यह कहना है बोकारो विस सीट के निर्दलीय उम्मीदवार समरेश सिंह का।
वे मजदूर मैदान में आक्रोश महारैली को संबोधित कर रहे थे। समरेश ने कहा कि यहां पार्टी कोई महत्व नहीं रखती है। बोकारो की जनता ने इस चुनाव को चुनौती के रूप में स्वीकार किया है। 1977 में जब पार्टी में ठुकराया था, तब जनता ने निर्दलीय चुनाव लड़ा कर पहली बार विधायक बनाया था।
आज जब अंतिम चुनाव लड़ रहे हैं, तब भी पार्टी ने धोखा दिया, तो जनता ने अपनाया और आखिरी बार भी निर्दलीय ही विधायक बनाने का ऐलान मजदूर मैदान में कर दिया। उन्होंने कहा कि जनता जनार्दन है और वे जनता के लिए समर्पित हैं। जनता के लिए यमराज से भी लड़ना पड़े तो लड़ जाएंगे।
ढोल-नगाड़ा और नारों से गूंजता रहा मजदूर मैदान
आक्रोश महारैली में समरेश सिंह के कार्यकर्ता काफी जोश में दिखे। चुनाव नहीं चुनौती है, हर हाल में जीतनी है... आदि के नारों से मजदूर मैदान काफी देर तक गूंजता रहा। ढोल और नगाड़ा लेकर उनके समर्थक और कार्यकर्ता नाच रहे थे। नगाड़ों की गूंज और झूमर नाच और छऊ नाच से मजदूर मैदान काफी देर तक गुंजायमान रहा। कार्यकर्ता इतना जोश में थे कि मंच से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित मुख्य सड़क तक समरेश की गाड़ी को लाने में लगभग आधा घंटा लग गया।
कई समाज के लोगों को किया सम्मानित
निर्दलीय समरेश सिंह ने मंच में विभिन्न समाज के लोगों को सम्मानित किया। उन्होंने हर समाज को उनकी ताकत का एहसास कराते हुए संबोधित किया और अपने ताकत से दिल्ली को हिलाने का आह्वान किया।
समरेश ने भोजपुरिया समाज के वीरेंद्र सिंह, भूमिहार समाज के गयाराम सिंह, चक्रधर शर्मा, जवाहर शर्मा, आदिवासी समाज के दुर्गा सोरेन, इंद्रजीत सोरेन, क्रांतिकारी इस्पात मजदूर संघ के महामंत्री राजेंद्र सिंह, कुशवाहा समाज के बाबूचांद महतो, चास नगर परिषद उपाध्यक्ष सह अल्पसंख्यक समाज के अब्दुल वाहिद खान, गोलबाबू अंसारी, शिवाजी समाज के पावर्ती चरण महतो, विश्वकर्मा समाज के संजय महादानी आदि मौजूद थे।