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पैसा कमाने को मानवता का गला घोंटा जा रहा : गोविंद

7 वर्ष पहले
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बोकारो . समय का ऐसा चक्र गया है जहां पैसा ही सबकुछ है। पैसा कमाने के लिए मानवता का गला भी घोंटा जा रहा है। आज समाज में विकास का मतलब पैसा होकर आध्यात्मिक, सामाजिक नैतिक विकास कोसों दूर रह गया है।

यह बातें राउरकेला से आए हिन्दी नाटक के निर्देशक गोविंद गिरि ने सेक्टर 2 स्थित कला केंद्र में आयोजित हिन्दी नाटक मानवता की ए, बी, सी, डी के दर्शकों को संबोधित करते हुए कही। गिरि ने कहा कि हम इस कदर गिर गए हैं कि पैसों की खातिर फुलवा को विधवा बना सकते हैं तो लाश को भी बेच सकते हैं। इस अवसर मुख्य अतिथि शितांशु प्रसाद ईडी पीएंडए, डीजीएम बी मुखोपाध्याय, बीके सिंह आदि उपस्थित थे।

अभिनय कला से बताई मानवता

बोकारो इस्पात संयंत्र में चल रहे राजभाषा पखवाड़ा के अंतर्गत शनिवार को सेक्टर 2 कला केंद्र में राजभाषा विभाग बीएसएल के तत्वावधान में हिन्दी नाटक मानवता की एबीसीडी...का आयोजन किया गया। राउरकेला से आए कर्मचारियों ने अपने अभिनय कला की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकार नृसिंह, गोविंद, जयंत, सत्य नारायण, अनिल, प्रभाकर, ललित,अशोक, देवेंद्र, बीबी ने जी गिरि के निर्देशन, धीमन के संगीत तथा संजय भारती रचित नाटक मानवता की एबीसीडी... की प्रस्तुति से आज के दौर में इंसान के चरित्र का जीवंत चित्रण करते हुए लोगों को महत्वपूर्ण सीख दी।

धीमन ने मोहा ने मन

शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम की शुरूआत भजन और गीत के साथ की गई। राउरकेला से आए संगीतकार धीमन दत्ता ने इस कार्यक्रम में अपने भजन की प्रस्तुति से कार्यक्रम में भक्ति रस को बिखेरा। वहीं दत्ता ने अपने सुरीले स्वर में गीत कसमे वादे प्यार वफा सब वादे हैं... तथा लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में.... की शानदार प्रस्तुति से सभी लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के बाद लोगों ने इसकी काफी सराहना की।