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इस्पात शिखर सम्मेलन में सुरक्षा मुख्य मुद्दा
इस्पातउद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में इस्पात उत्पादन वर्तमान 812 लाख टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 2025 तक 3000 लाख टन प्रतिवर्ष तक हासिल करने के लिए एक नई इस्पात नीति विचाराधीन है। इसकी घोषणा इस्पात राज्य मंत्री विष्णु देसाई ने की। नई नीति के क्षमता वृद्धि और कच्चे माल की सुरक्षा, पर्यावरण की चुनौतियों और भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुद्दों पर केंद्रित होने की संभावना है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित इस्पात शिखर सम्मेलन 2014 को संबोधित करते हुए मंत्री ने सूचित किया कि ईस्टर्न कारीडोर की स्थापना के संदर्भ में उद्योग द्वारा सामना किए जा रहे किराए और अन्य लाजिस्टिक्स मुद्दों पर पहले ही विमर्श किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इस्पात क्षेत्र में अनुसंधान की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए एक राष्ट्रीय संस्था होनी चाहिए।
इस्पात सचिव राकेश सिंह ने कहा कि सकल घरेलू इस्पात में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की दिशा में सरकार द्वारा किया जा रहा प्रयास इस्पात क्षेत्र द्वारा एक बड़ी भूमिका निभाने का आह्वान करता है। ग्रीनफील्ड इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को शामिल करते हुए स्पेशल पर्पज वेहिकल के संबंध में विमर्श जारी है। स्पेशल पर्पज वेहिकल कच्चे माल लिंकेज को सुनिश्चित करेंगे और परियोजना को अनुमति प्रदान करेंगे और इसके बाद उपयुक्त तंत्र के जरिये निजी क्षेत्र को नीलामी या बेचने के लिए जारी किया जाएगा।
इससे पहले इस्पात सीआईआई राष्ट्रीय समिति और सेल दोनों के अध्यक्ष सीएस वर्मा ने इस्पात क्षेत्र द्वारा क्षमता को साकार करने में निरोधक विभिन्न चुनौतियों की रूपरेखा निर्माण द्वारा विचार विमर्श का आह्वान किया। उन्होंने कच्चे माल की अनुपलब्धता, लाजिस्टिक्स की उच्च लागत, मानव संसाधन की कमी और अनुसंधान एवं विकास के निम्न व्यय पर प्रकाश डाला। उन्होंने चीन से स्टील की डंपिंग को एक्सक्लुड करने पर जोर दिया और जापान और दक्षिण कोरिया के साथ सीईपीए से इस्पात को एक्सक्लुड करने की आवश्यकता की ओर इशारा किया।
सीआईआई के अध्यक्ष और अध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्रबंध निदेशक डीसीएम श्रीराम लिमिटेड अजय श्रीराम ने भारत निर्माण के चलते जोर पकड़ते आधारभूत निर्माण की वजह से स्टील की मांग के तेज गति से बढ़ने की ओर इशारा किया। उन्होंन