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छोटी पुत्री दिव्या ने दी पिता को मुखाग्नि

7 वर्ष पहले
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सामाजिकमान्यताओं को रुढ़िवादी परपंराओं को दरकिनार करते हुए तीन बेटियों में सबसे छोटी पुत्री ने अपने पिता को मुखाग्नि दी है। पुत्र नहीं हो तो क्या हुआ पुत्री भी सब कर सकती है, यह बोकारो के सेक्टर तीन निवासी मार्केण्डय राय के निधन के बाद देखने को मिला। पुत्री ने सिर्फ मुखाग्नि ही नहीं, बल्कि अर्थी को कंधा भी दिया। सेक्टर तीन ई, आवास संख्या-371 निवासी 58 वर्षीय मार्केण्डय राय के निधन के बाद उनकी तीन पुत्रियों में सबसे छोटी पुत्री दिव्या शिखा ने मुखाग्नि दी। पेशे से मार्केण्डय राय ट्रांसपोर्टिंग का काम करते थे। विगत 20 मई को किसी वाहन की चपेट में आने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद उनके स्पाइनल कोड का आपरेशन भी हुआ था। वे चल-फिर नहीं सकते थे। उनकी तीनों पुत्रियों में दो पुत्रियों मंजू आनंद निक्की की शादी हो चुकी है। जबकि छोटी पुत्री दिव्या शिखा अविवाहित है। परिवार सेक्टर तीन में ही रहते हैं।

प|ीका वर्ष 2010 में ही हो चुका है निधन | स्व.पांडेय की प|ी गिरिजा राय का देहांत वर्ष 2010 में ही हो चुका है। स्व. पांडेय का एक भी पुत्र नहीं है। वे मूलत: बिहार के बक्सर जिला के घनसोई थाना क्षेत्र के कथराई के रहनेवाले थे। स्व. पांडेय के पुत्र की तरह उनके दामाद उनके घर की देखभाल एक अभिभावक के रूप में करते हैं। स्व. पांडेय का अंतिम संस्कार गरगा नदी के तट पर किया गया।

मुखाग्नि की प्रक्रिया करती पुत्री।

अंतिम संस्कार के लिए पिता की अर्थी के कंधा देतीं बेटियां और अन्य परिजन।