नृत्य जीवन के लिए बेहद अहम है : शैलजा शुक्ला
नृत्यजीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। शास्त्रों के अनुसार देवता भी नृत्य करते थे। देवताओं को खुश करने के लिए पूजा के बाद नृत्य को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। नृत्य से शरीर का भी संपूर्ण विकास होता है। ये कहना है आर्ट ऑफ लिविंग के बेंगलुरू आश्रम से आईं अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षिका शैलजा शुक्ला का। वे रविवार को आर्ट ऑफ लिविंग के बोकारो चैप्टर के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय श्रीश्री नृत्य नाट्य कोर्स के समापन के अवसर पर बोल रही थीं। नाट्य कोर्स का समापन सेक्टर-2 सी स्थित जैन मंदिर में हुआ।
शिक्षकएवं शिष्यों ने लिया हिस्सा|श्रीश्री नृत्यनाट्य कोर्स में आर्ट ऑफ लिविंग बोकारो के लगभग 100 शिक्षक एवं शिष्यों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर शैलजा शुक्ला ने शिक्षक एवं शिष्यों को नृत्य एवं ज्ञान के सथ-साथ ध्यान की गहरी अनुभूति कराई।
नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पूजा है : सोनी
इसअवसर पर संस्था के प्रवक्ता संजय सोनी ने कहा कि बोकारो में पहली बार इस तरह का कोर्स आयोजित कराया गया। उन्होंने कहा कि नृत्य का कोर्स करने के बाद उन्हें लगा कि नृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि पूजा है।
नाट्य कोर्स के समापन पर रिहर्सल करते लोग।
कार्यक्रम का आयोजन विनोद तृप्ति एवं दीपक कुमार महतो ने किया, जबकि संचालन परमेश्वर गोयल ने किया। इस मौके पर शिक्षक संध्या सिन्हा, पीसी मिश्रा, किरण मिश्रा, सीमा कुमार एचएस त्रिपाठी, सुनील कुमार, रेखा चौधरी, मीनाक्षी, इन्दू अग्रवाल, डॉ. विनय योग, विनोद सौरव, विजय जैन, अरुण दुबे आदि मौजूद थे।