अब किराये के वाहन में ही चलेंगे अफसरान
> उपायुक्त नहीं चलेंगे टोयोटा और इनोवा कार में, उनके लिए अब एंबेसडर, टाटा सफारी या स्कॉर्पियो कार ही मिलेगी
> कर्नाटक और उत्तराखंड में है यह व्यवस्था
राजेशसिंह देव| बोकारो
अबसरकारी अधिकारियों के लिए वाहन नहीं खरीदे जाएंगे। झारखंड प्रशासनिक सेवा और गैर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों सहित डीसी और प्रधान सचिव स्तर तक के अधिकारियों को किराये के वाहन की व्यवस्था करनी होगी। हर स्तर के अधिकारियों के भ्रमण या उपयोग के लिए अलग अलग वाहन चिह्नित किए गए हैं।
राज्यपाल के आदेश पर यह आदेश सरकार की प्रधान सचिव राजबाला वर्मा ने जारी किया है। बोकारो के डीसी टोयोटा इनोवा से घूमते हैं पर इस आदेश के आधार पर टाटा इनोवा कार में प्रधान सचिव, मुख्य सचिव या उनके समकक्ष पदाधिकारी चलेंगे या जिलास्तर के प्रोटोकाल के लिए रखे जाएंगे।
वाहन रखने से क्या होगा लाभ
वाह्यस्रोत से वाहन रखने से सेवा क्षेत्र का विस्तार होगा और निजी क्षेत्र में रोजगार एवं उद्यमिता बढ़ेगी। रोड टैक्स के रूप में व्यावसायिक वाहन निबंधन एवं आमदनी बढ़ेगी। प्रशासनिक खर्च घटाने के क्रम में नई नियुक्ति नहीं करनी होगी। कर्नाटक, उत्तराखंड और देश के अन्य राज्यों के अनुरूप खर्च में बचत होगी। अनावश्यक वाहन का क्रय नहीं किया जाएगा और पुराने वाहनों की नीलामी की समस्या नहीं होगी। इससे करोड़ों की क्षति होती है।
क्या है नुकसान
पुराने वाहनों की मरम्मत को हर तीन-चार वर्ष में 50 हजार से एक लाख तक खर्च होता है। पुराने वाहन सुदूर क्षेत्रों में भ्रमण के लिए विश्वसनीय नहीं होते हैं। वाहन की गुणवत्ता को लेकर प्रश्न उठते रहते हैं। अधिकतर सरकारी वाहन बिना रोड टैक्स के चलते हैं। दुर्घटना होने पर सरकारी को भारी मुआवजा देना पड़ता है। इससे आर्थिक क्षति के साथ ही जनता को लाभ मिलने में भी विलंब होता है।
जिले में पदस्थापित भारतीय प्रशासनिक सेवा स्तर के अधिकारियों के लिए एंबेसेडर, टाटा सफारी या स्कॉर्पियो। जिले में पदस्थापित जेपीएससी या गैर जेपीएससी स्तर के अधिकारियों के लिए टाटा सूमो, बोलेरो या समकक्ष। अन्य विभागों के निदेशक एवं विशेष सचिव एवं समकक्ष के लिए स्विफ्ट डिजायर, टाटा इंडिगो, ईसीएस या टोयोटा इटोज। विभागों के प्रधान सचिव, सचिव एवं उनके समकक्ष के लिए मारुति एसएक्स 4, होंडा सिटी, टोयोटा इटियोस, टाटा सफारी या टोयोटा इनोवा। मुख्य सच