बोकारो। चासनगर परिषद को नगर निगम का दर्जा मिलने से अब चास का अपेक्षित विकास होगा। शहर के गली- मोहल्लों, बाजार, हटिया, बिजली, पानी सहित कई मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए काम होगा। इसके लिए अब नगर निगम कार्यालय में ही मास्टर प्लान बनेगा। इससे पहले एक योजना पर एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने का अधिकार नगर परिषद को नहीं था।
जबकि नगर निगम बनने से 10 करोड़ तक की योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति देने और काम कराने का अधिकार मिल जाएगा। सरकार की ओर से नगर परिषद से ज्यादा नगर निगम को राशि मिलेगी, वहीं किसी भी बड़ी योजना को धरातल पर उतारने के लिए विभागीय आदेश के इंतजार में दिन काटना नहीं पड़ेगा।
चार सरकारी कर्मियों के भरोसे चल रहे नगर परिषद कार्यालय में लगभग दो सौ कर्मियों की नियुक्ति भी होगी और गली मुहल्लों की सफाई के साथ 200 और 500 फीट नाली और पीसीसी पथ निर्माण के बजाय एकमुस्त किसी भी मुहल्ले में बृहद तौर पर योजनाओं की स्वीकृति दी जा सकती है।
ये मिलेगी सुविधा : नगर निगम में अधिकारी से लेकर कर्मचारियों तक की बढ़ोत्तरी होने से लोगों को काम कराने में आसानी होगी। अभी जन्म- मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने, नक्शा पास कराने, होल्डिंग टैक्स जमा करने, जलकर जमा करने सहित कई तरह की समस्याअों के समाधान के लिए हफ्तों चक्कर लगाना पड़ता है।
कर्मचारियों की कमी के कारण एक- एक कर्मचारी पर कई काम का बोझ है। कर्मियों की संख्या ज्यादा होने पर उनपर काम का बोझ घटेगा, तो लोगों का काम भी आसानी से होगा।
यह आएगा बदलाव : नगर परिषद, चास में कार्यपालक पदाधिकारी एक, सरकारी कनीय अभियंता एक, अनुबंध का कनीय अभियंता एक, एक प्रधान सहायक और चार सरकारी कर्मी के अलावा लगभग आधा दर्जन दैनिक वेतनभोगी कर्मी। नगर निगम बनने के बाद नए भवन के साथ मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी एक, नगर अभियंता एक, टाउन प्लानर एक, सहायक अभियंता दो, कनीय अभियंता पांच और लगभग 200 कर्मी होंगे।
बढ़ेगा बजट : नगर परिषद में एकल योजना में एक करोड़ तक खर्च करने का अधिकार होने के कारण बजट छोटा बनता था। इसलिए सरकार राशि भी कम मिलती थी। इस वित्तीय वर्ष में चास नगर परिषद को सरकार से आवंटन और टैक्स वसूली में मात्र तीन करोड़ 38 लाख रुपए मिले हैं। वहीं नगर निगम बन जाने के बाद टैक्स वसूली दोगुणा हो जाएगी, वहीं सरकार से विकास के लिए प्रतिवर्ष लगभग एक सौ करोड़ रुपये आवंटन मिलने की संभावना रहेगी।
अतिक्रमण भी टूटेगा : नगर निगम बनने के बाद शहर का विकास मास्टर प्लान के तहत किया जाएगा। इस दौरान सड़क, नाली, साफ- सफाई आदि पर विशेष फोकस रहेगा। गली- मुहल्लों की सड़कों को चौड़ा भी किया जाएगा। मास्टर प्लान बनने के बाद वैसे लोगों पर मुसिबत आएगी, जो नक्शा पास कराते समय चालाकी दिखाए हैं।
सड़क और नाली के लिए छोड़ी गई जमीन को अतिक्रमण कर घर बनाने वाले लोगों को अतिक्रमणकारी के दायरे में लाया जाएगा। उनसे अतिक्रमण खाली कराकर सड़क की चौड़ीकरण करने के साथ जलजमाव की समस्या के समाधान के लिए ढंग की नालियां भी बनेगी। नगर निगम बनने के बाद अतिक्रमण हटाए जाने पर बिना प्लानिंग के बसे चास शहर में हजारों लोगों पर मुसिबत भी आएगी।
50 करोड़ की शहरी जलापूर्ति योजना में वार्ड नंबर एक सहित कई वार्ड के कई मुहल्लों पानी सप्लाई का सर्वे नहीं किया गया है। इस योजना से कई मोहल्ले वंचित रह गए हैं। योजना अभी चालू नहीं हुई है, लेकिन संवेदक द्वारा पाइपलाइन बिछाने के दौरान उन मोहल्लों को छोड़ दिया गया है।
इन मोहल्लों को जोड़ने के लिए लगभग 10 करोड़ की योजना बनेगी। इसके लिए पिछले कई वर्ष से नगर परिषद द्वारा नगर विकास विभाग में पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अब पत्राचार की जरूरत नहीं होगी। ऐसी योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति देने के लिए यहीं सक्षम अधिकारी पदस्थापित होंगे।
अभी सरकारी आवास में चल रहा है कार्यालय
वर्तमान समय में अनुमंडल स्तर के लिए बने आवास में नगर परिषद का कार्यालय चल रहा है। लगभग दो दशक पहले डीएसपी कालोनी में सरकारी अधिकारियों और कर्मियों के लिए आवास बनाए गए थे। लेकिन यहां अधिकारी कभी नहीं रहे। 1977 में चास नगर निकाय बनने के बाद इसका कार्यालय मेनरोड में था।