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हंगामे के बाद पार्षदों ने निगम बोर्ड बैठक का किया बहिष्कार

5 वर्ष पहले
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चासनगर निगम में बोर्ड की बैठक उप महापौर और पार्षदों के बहिष्कार के कारण नहीं हो पाई। वार्ड पार्षद समय पर बैठक में आए, बैठक प्रारंभ होने से पहले बाहर निकल गए। हंगामे और बहिष्कार की भेंट चढ़ी बैठक में मंगलवार को 15 एजेंडों पर विचार होना था। भास्कर ने पहले ही आगाह कर दिया था कि बोर्ड की बैठक में हंगामा होगा। सुबह 11:30 बजे से बोर्ड की बैठक होनी थी। महापौर, उप महापौर, पार्षद और अधिकारी समय पर बैठक में आए। बैठक शुरू भी नहीं हो सकी थी कि पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे के बाद पार्षदों ने बैठक के बहिष्कार का ऐलान करने के साथ ही हाल से बाहर निकलने लगे। बाहर निकलकर पार्षदों ने नारेबाजी भी। पार्षदों ने भ्रष्टाचार और मनमानी के विरुद्ध नारे लगाए। इसके बाद पार्षद निगम से निकलकर अपने-अपने घरों को लौट गए।

कहीं भ्रष्टाचार है तो जांच करवा लें : सीईओ

^सीईओसंदीप कुमार ने कहा कि निगम में हर काम नियम संगत हो रहा है। कहीं किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं है। हर काम पारदर्शी तरीके से हो रहा है। अगर इसके बाद किसी को लगता है कि भ्रष्टाचार हो रहा है तो किसी भी एजेंसी से जांच करवा लें। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

अधिकारी मनमानी कर रहे हैं : डिप्टी मेयर

^बहिष्कारके संबंध में डिप्टी मेयर अविनाश कुमार ने कहा कि वे पार्षदों के साथ हैं। निगम में अधिकारी मनमानी कर रहें हैं। पार्षदों की बातों पर अमल नहीं होता। पाइप लाइन बिछाने के लिए कंसलटेंट नियुक्त नहीं हुआ और पदाधिकारियों ने रेट टेंडर निकाल दिया। फाइलें दबा दी जाती हैं।

विकास में कुछ पार्षद बन रहे हैं रोड़ा : मेयर

^पार्षदोंके बोर्ड की मीटिंग का बहिष्कार करने के संबंध में मेयर भोलू पासवान ने कहा कि ठेका नहीं मिलने पर कुछ वार्ड पार्षद विरोध कर रहे हैं। इन्हीं ने अन्य पार्षदों को बरगलाया। ऐसे पार्षद विकास में रोड़ा बन रहें हैं। जबकि चास का विकास तेज गति से हो रहा है। पिछले छह माह में चास में जितने विकास के काम हुए उतना पहले कभी नहीं हुआ।

भास्कर में मंगलवार को छपी खबर।

निगम कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते वार्ड पार्षद।

एक-एक कर बाहर निकलतीं महिला वार्ड पार्षद।

मीटिंग में बैठे मेयर, डिप्टी मेयर अधिकारी।

पार्षदों ने बहिष्कार का बताया कारण

30वार्डों के पार्षदों ने सीईओ के नाम ज्ञापन में बैठक के बहिष्कार के कारण बताते हुए कहा कि पार्षदों के बगैर रायशुमारी के मेयर दो माह से स्वयं हर फैसला कर रहे हैं। बोर्ड से पारित कराए बिना योजना का चयन, जल समिति अन्यान्य समितियों का गठन नहीं करना जताता है कि महापौर मनमानी कर रहे हैं। इसके खिलाफ पार्षदों ने बैठक के बहिष्कार की घोषणा की है। यह सुनिश्चित हो कि बोर्ड की अनुमति बिना योजना का चयन या निविदा का आमंत्रण नहीं हो। दूसरे ज्ञापन में कहा कि पार्षदों ने यह तय किया है कि वार्ड में सफाई कर्मी की जरूरत के मद्देनजर सफाई कर्मी स्थापना, प्रत्येक वार्ड की वार्ड समिति से चयनित हों, क्योंकि निगम के 2011-12 नियमावली के तहत सफाई कार्य हर वार्ड की वार्ड समिति की देखरेख में कराना है।

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