अपहरणकर्ता शुभम को नक्सली बना देते!
दिल्लीसे अपहृत 11वीं के छात्र शुभम ने बताया कि अपरहणकर्ता उसे नक्सली संगठन एमसीसी में शामिल करने की बात कह रहे थे। उसके साथ कई और बच्चों को भी अगवा किया गया था। इस खुलासे के बाद तो पुलिस के कान खड़े होने चाहिए, क्योंकि शहर में ऐसा गुट सक्रिय है जो बच्चों को अगवा कर उन्हें नक्सली बनाने में जुटा है। उधर, बुधवार को अपहरणकर्ताओं की तलाश में सिटी पुलिस भटकती रही। मंगलवार की रात भी पुलिस ने स्टेशन, बस स्टैंड के आसपास छापा मारा। पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी को खंगाला। इसमें कुछ संदिग्ध दिखे हैं। रात में शुभम के पिता अशोक मिश्रा प|ी के साथ बोकारो पहुंचे। पुलिस ने उनके बयान दर्ज किए।
सीसीटीवीकैमरे में कैद हैं तस्वीरें
पुलिसने स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाला। स्टेशन पर कुल 30 कैमरे लगे हुए हैं। इसमें से पुलिस के काम के तीन कैमरे निकले। सीसीटीवी कैमरे में ट्रेन सात बजकर आठ मिनट पर रूकी। उसके साथ चार से पांच लोग दिखाई दिए। सभी शुभम के साथ ब्रिज के रास्ते बाहर निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं।
पीछा करने की दी थी जानकारी : अशोक
बोकारो| शुभमको लेने पिता अशोक मिश्रा, चाचा प्रमोद, वरुण, बुआ सीमा और फूफा रवि बुधवार रात सिटी थाना पहुंचे। उन्हें देखते ही शुभम रोते हुए उनसे लिपट गया। पिता ने कहा कि उनकी किसी से दुश्मनी नहीं है। शुभम पढ़ाई में अच्छा है। उसने मुझे घटना के एक दिन पहले बताया था कि उसका कोई पीछा करता है। मैंने इस बारे में बात करने के लिए ही सोचा था, लेकिन दूसरे दिन यह घटना हो गई।
कैसे हुआ अपहरण
शुभमने बताया कि सोमवार की शाम पटपड़गंज में ट्यूशन पढ़ने के लिए साढ़े छह बजे निकला। कुछ दूर उसके पीछे से किसी ने रिवाल्वर सटाकर चुपचाप आगे बढ़ते रहने के लिए कहा। वह अंजान शख्स दो तीन गली आगे हसनपुर ले गया। वहां उसे बस में बैठाया। वहां पहले से ही एक आदमी था। उसे सौंपकर वह बस से उतर गया। अगला आदमी उसे आनंद विहार स्टेशन ले गया। साढ़े सात बजे झारखंड स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस के जनरल बोगी में बैठाया। वहां छह आदमी पहले से थे। सबकी उम्र 30 से 32 वर्ष होगी। उसे उनके बीच बैठाया गया। शाम सात बजे ट्रेन बोकारो पहुंची। शुभम ने बताया कि वहां कई संदिग्ध लोगों के साथ 20 से 30 किशोरों को देखा। उसे ऑटो में बैठाया गया उसके साथ दो अपहृत किशोर और दो अपहरणकर्ता थे। ऑटो स्टेशन से निकलकर नया मोड़ पहुंचा तो पुलिस पिकेट देख वह आटो से भाग कर पुलिस के पास पहुंचा।
शुभम ने बताया कि स्टेशन से चलते हुए नयामोड़ पहुंचने के पहले ही एक अपहृत किशोर को एक आदमी लेकर उतर गया। कुछ दूर चलने के बाद ऑटो एक शराब की दुकान के पास रुका और उसे नीचे उतार दिया गया। वहां उसे अमित नामक युवक को सौंप दिया गया। उसने उसके कंधे पर हाथ लगाकर अपने साथ चलने को कहा। कुछ आगे बढ़ते ही शिवम ने ऊंची आवाज में बोलते हुए उसका विरोध किया। उसने तलवार निकाल कर उसे डराया। शुभम यह कह भाग निकला कि उसका बैग सड़क पर छूट गया है। वह भाग कर सीधे नया मोड़ के बिरसा चौक स्थित ट्रैफिक पुलिस पिकेट में पहुंचा और पुलिस को सारी बात बताई। उसने पुलिस को बताया कि अपहरणकर्ता आपस में बात कर रहे थे कि सभी लड़कों को गढ़वा, गुमला, पलामू, गिरिडीह, रांची आदि जगहों पर भेजना है। उन्हें एमसीसी में शामिल किया जाएगा।
पुलिस कर रही है जांच
^बोकारोके एसपी वाईएस रमेश ने बताया कि शिवम के माता-पिता से पहले बात की जाएगी। उनके बयान के बाद आगे की जांच की जाएगी। रात में भी पुलिस ने कई स्थानों पर जाकर जांच की। इसमें अभी किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है।