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अमित-सुशील को नम आंखों से विदाई

5 वर्ष पहले
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सड़कहादसे ने दो परिवारों जिंदगी बदरंग कर दी। इस दुर्घटना ने एक साथ दो खुशहाल परिवारों का सुख-चैन छिन लिया। दोनों परिवारों की जिंदगी को बदरंग करने वाला यह हादसा धनबाद-बोकारो राष्ट्रीय राजमार्ग 32 पर गुरुवार की आधी रात को हुई। अमित सिंह (32) की मौत से उसके घर और रिश्तेदारों में मातम छाया है। अमित अपने पीछे प|ी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं। उन अबोध बालकों को यह भी एहसास नहीं है कि उनके पिता की छाया उनके ऊपर से उठ चुकी है। उनकी प|ी का रो-रो कर बुरा हाल है। उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वहीं अमित के बुजुर्ग पिता अपने बेटे के गम में इस कदर डूब गए हैं कि कब रात हुई और कब दिन उन्हें इसकी भी सुध नहीं है।

उसके पिता चास के नेशनल इंश्योंरेस में डीओ के पद पर काम करते हैं। वहीं उनका इकलौता बेटा अमित सेक्टर चार स्थित रिलायंस जनरल इंश्योंरेस में काम करता था। ऐसा ही हाल उसके मित्र सुशील सिंह के भी घर की है। इस हादसे ने सिर्फ अमित का ही नहीं सुशील का भी घर परिवार उजाड़ दिया।

वह टीवीएस शोरूम में काम करते थे। इन दोनों दोस्तों को अाने वाले संकट का जरा भी आभास नहीं हुआ और 11 फरवरी की रात इन दोनों के साथ-साथ इनके परिवारों के लिए काली रात साबित हुई। रात को ही इनके शव बोकारो चुके थे। इनके परिवारों को इनकी मौत की खबर लग चुकी थी। शाम को दोनों दोस्तों अमित और सुशील का चास के गरगा पुल के नीचे श्मशान में अंतिम दाह संस्कार कर दिया गया।

इस दौरान नेशनल इंश्योरेंस में करने करने वाले अमित के पिता अरुण सिंह के कई साथी कर्मचारी, अमित के दोस्त और सुशील के परिवार समेत उसके दोस्त, सहकर्मी आदि भी शामिल हुए। सबने दोनों काे नम आंखों से आखिरी बार अलविदा कहा।

मृतक अमित के आवास के बाहर भीड़।

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