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मंडे पॉजिटिव | एके सिन्हा के प्रयास से आशा लता नर्सरी दिव्यांगों के लिए वरदान साबित हो रही है
आशालता नर्सरी दिव्यांगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। बोकारो इस्पात संयंत्र के सहायक महाप्रबंधक एके सिन्हा इस नर्सरी के माध्यम से दिव्यांगों को स्वरोजगार देकर, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने में सहायक बन रहे हैं। सिन्हा ने मेहनत और लगन से एक साल दो महीने में नर्सरी काे कहां से कहां पहुंच दिया। नर्सरी की प्रेरणा प|ी आरती सिन्हा से मिली। दो साल तक तक सिन्हा ने आशा लता विकलांग विकास केंद्र में दिव्यांग को मुफ्त में पढ़ाया। एक दिन प|ी ने कहा कि इन बच्चों को पढ़ाने से कुछ नहीं मिलेगा, बढ़िया है कि इन्हें कुछ काम सीखा दिया जाए, ताकि ये अपने पैरों पर खड़ा हो सके। आरती कहती है कि मूक-बधिर को कोई काम नहीं देता है। अगर इनके हाथ में हुनर हाे जाएगा तो कुछ रोजगार कर लेंगे। केंद्र के निदेशक भवानी शंकर जायसवाल ने बच्चों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए जमीन उपलब्ध कराई।
प्रोफाइल
एकेसिन्हा, निवासी सेक्टर 5डी, आवास संख्या-2073, बीएसएल में एजीएम के पद पर कार्यरत, दो पुत्र अनुपम (नौकरी छोड़ करे रहें है सिविल सेवा की तैयारी) और अनुराग(फूड टेक्नोलॉजी में अध्ययनरत)।
एक साल में चौदह को मिला रोजगार
एकसाल में नर्सरी से चौदह दिव्यांगों को जोड़ा गया। सुबह साढ़े पांच बजे से पौने आठ बजे तक वे बच्चों के साथ नर्सरी में काम करते हैं। फिर अपनी ड्यूटी के लिए निकल जाते हैं। बच्चें अपनी शारीरिक क्षमता के हिसाब से कोई जमीन की कोड़ाई करता, पौधा लगाता तो कोई पौधों में पानी डालता है।
सौदिव्यांगों को जोड़ने का लक्ष्य
सिन्हाका कहना है कि 2017 तक एक सौ दिव्यांगों को नर्सरी से जोड़ने का लक्ष्य है। 9 दिसंबर 2014 को आशा लता की आंगन से इसकी शुरूआत पंद्रह तरह के पौधे से की गई। सिन्हा कहते हैं कि पहले दिन दो रुपए का फूल बिका। लेकिन देखते-देखते अब स्थित यह है कि नर्सरी लगभग एक एकड़ में है, जिसमें 160 वैराइटी के फूल और औषधीय पौधे हैं। नर्सरी में जैविक खाद जैविक कीटनाशक और पत्तों से खाद तैयार किए जाते हैं।
दिव्यांगों को रोजगार देकर संवार रहें है जिंदगी
पौधों को पानी देते एके सिन्हा, प|ी आरती सिन्हा और कार्यरत दिव्यांग बच्चे।