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आज स्वदेशी मेला का अंतिम दिन, उमड़ सकती है लोगों की भारी भीड़

6 वर्ष पहले
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11फरवरी को स्वदेशी मेला का अंतिम दिन है। अंतिम दिन मेले में लोगों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। मंगलवार को सेक्टर 4 मजदूर मैदान में जारी इस्पांचल स्वदेशी मेला में मिथिला सांस्कृतिक परिषद के तत्वावधान में बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन में आठ भाषाओं मैथिली, हिन्दी, भोजपुरी, मगही, संताली, खोरठा, नागपुरी, उर्दू के कुल 20 रचनाकारों ने अपनी रचनाएं सुनाईं। उद्घाटन मुख्य अतिथि मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष सह मुख्य अतिथि रामाधार झा ने किया। उन्हेंनो कवियों द्वारा पढ़ी गई रचनाओं की प्रशंसा कवि की और कहा कि साहित्य समाज के लिए यह जरूरी है। साहित्यकार समाज को दिशा देते हैं। विशिष्ट अतिथि विधायक विरंची नारायण ने अपने संबोधन में कहा कि इस कवि सम्मेलन में कवियों ने जिस तरह स्तरीय रचनाओं का पाठ किया वह बहुत ही प्रशंसनीय है। स्वागत भाषण परिषद महासचिव हरिमोहन झा ने किया। भाजपा के पूर्व बोकारो जिलाध्यक्ष रोहित लाल सिंह भी उपस्थित थे। कविगण द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। उसी कड़ी में यह बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है। हिन्दी मैथिली के यशस्वी साहित्यकार बुद्धिनाथ झा की अध्यक्षता युवा साहित्यकार डा. संतोष कुमार झा के संचालन में आयोजित कवि सम्मेलन की शुरुआत वरिष्ठ गीतकार विनय कुमार मिश्र ने सरस्वती वंदना सस्वर सुनाकर की। कवि-गीतकार गायक अरुण पाठक ने अपनी रचना मैथिली गीत होली सुनाकर समां बांध दिया। डा. परमेश्वर भारती, उषा झा, ममता राजहंस, डा. रंजना श्रीवास्तव, प्रो. जगनारायण राम (हिन्दी), विजय शंकर मल्लिक, अमीरीनाथ झा अमर, डा. सन्तोष कुमार झा, राजीव कुमार कंठ, सुनील मोहन ठाकुर (मैथिली), डा. विश्वंभर पाण्डेय (भोजपुरी), प्रदीप कुमार दीपक (खोरठा), दिलकश बोकारवी (उर्दू) आदि ने काव्य पाठ किए।

एक रुपए में हो रही प्लॉट की बुकिंग

इसकेअलावा मेले में मकान की चाहत रखने वालों के लिए कृष्णा प्रेम वाटिका मात्र एक रुपये में प्लॉट की बुकिंग कर रही है। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी जनोपयोगी तथा सामाजिक सुरक्षा के तहत आने वाली पॉलिसी के बारे में लाेगों को जानकारी दे रही है। स्वदेशी मेले में ज्ञानवर्धक, स्वास्थ्यवर्द्धक शिक्षा से संबंधित स्टॉल मुख्य आकर्षक का केंद्र बने हुए हैं। मेले में संत निरंकारी मिशन की ओर से निरंकारी एक परिचय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जबकि मंच की ओर से गांव से पलायन आदि पर संगोष्ठी हो हो रहे हैं।

बहुभाषी कवि सम्मेलन में बही काव्य की सरिता

कविता पेश करती कवयित्री।