बोकारो. अपने फायदे के लिए देश के सियासतदानों ने लोगों को समुदाय में बांट दिया। हम सब बंटते चले गए। भारत में कोई एक वर्ग अल्पसंख्यक नहीं है। पारसी, सिख, जैन, मुस्लिम आदि कई समुदाय हैं जिन्हें अल्पसंख्यक कहा जा रहा है। अल्पसंख्यकों के साथ बहुसंख्यक समुदाय के भी लोगों की स्थिति सामान्य है। समस्याएं दोनों समुदाय में है। सभी वर्गों के विकास के लिए शिक्षा एकमात्र आधार है। सभी लोगों को शिक्षा के साथ जोड़कर विकास के पथ पर एकसाथ लाया जा सकता है।
यह बातें विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डा. गुरदीप सिंह ने अल्पसंख्यकों की दिशा दशा पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि कही। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण झारखंड की गिनती पिछड़े राज्यों में होती है। इसका एकमात्र कारण शिक्षा का अभाव एवं ईमानदार राजनीति की है। देश के कई राज्यों में अल्पसंख्यकों की स्थिति बहुत अच्छी है। झारखंड में भी अगर सभी वर्ग मिलकर कार्य करें तो वे अल्पसंख्यक शब्द ही खत्म हो जायेगा।
डा. सिंह ने कहा कि भगवान ने सबको एक बनाया था। लेकिन सियासी फायदों के लिए वर्षों से राजनेताओं ने हमें समुदाय में बांट रखा है। मुस्लिम समाज खासकर महिलाएं शिक्षा के क्षेत्र में काफी पीछे रह गई हैं। उन्हें समान अधिकार के साथ शिक्षा से जोड़ना समय की मांग है।
इससे पहले सेमिनार के चेयरमैन सह सिटी कालेज के प्राचार्य डा एसके शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि झारखंड में आदिवासी समाज काफी पिछड़ा है। देशभर से आए शिक्षाविदों के विचार एवं मार्गदर्शन से राज्य के अल्पसंख्यकों की दिशा दशा मजबूत होगी।
इस अवसर पर जेजे कालेज झुमरीतलैया के प्राचार्य अली इमाम खान, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के डीन फैकल्टी प्रोफेसर डा. एसपी शर्मा, चास कालेज चास के प्राचार्य डा. पीएल वर्णवाल, विस्थापित कालेज बालीडीह के प्राचार्य डा. सत्यजीत कुमार सिंह, बोकारो महिला कालेज की प्राचार्या डा. कुमकुम गुप्ता, सेमिनार के आयोजन सचिव डा. एके मांजी, संयोजक डा. मो. हसीन अख्तर आदि उपस्थित थे। बीएस सिटी कालेज के तत्वावधान में इंडियन काउंसिल सोशल साइंस रिसर्च दिल्ली द्वारा प्रायोजित झारखंड में अल्पसंख्यकों की दिशा दशा विषय पर दो दिवसीय सेमिनार शनिवार को शुरू हुआ।