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श्रीकृष्ण-सुदामा की अनूठी थी मित्रता : आचार्या

7 वर्ष पहले
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मित्रताकरनी हो तो श्रीकृष्ण-सुदामा की तरह करना चाहिए। उन दोनों की मित्रता अनोखी थी। सुदामा संकोचवश श्रीकृष्ण के पास जाना नहीं चाहते थे। वे जानते थे कि भगवान श्रीकृष्ण एक राजा हैं और वे एक गरीब व्यक्ति हैं। अगर कहीं श्रीकृष्ण ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया तो उन्हें काफी दुख होगा। यह सोचकर सुदामा श्रीकृष्ण के पास जा नहीं रहे थे। इसके बाद सुदामा ने श्रीकृष्ण के लिए एक कपड़े में जो थोड़े बहुत चावल के कण थे, उसे लेकर वे भगवान के द्वार तक पहुंच तो गए, लेकिन इसके बाद भी उन्हें दरबानों से यह कहने में संकोच हो रहा था कि वे श्रीकृष्ण के मित्र हैं। यह बातें दुंदीबाद प्राचीन काली मंदिर में अपने प्रवचन में आचार्या सुश्री सुरक्षा ने कही। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता ऐसी थी कि जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण ने सुनी कि सुदामा उनके द्वार में खड़े हैं। वे दौड़ते हुए स्वयं बाहर आकर गले लगाकर उनका स्वागत किया।

प्रवचन करतीं आचार्या।