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आत्मविश्वास बढ़ाने का माध्यम बनी भास्कर की कंप्यूटर ट्रेनिंग

6 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज नेटवर्क | धनबाद/भोपाल

दैनिकभास्कर द्वारा वरिष्ठ नागरिकों गृहणियों के लिए आयोजित की जा रही निशुल्क कंप्यूटर ट्रेनिंग प्रोग्राम में अब तक 7000 से अधिक रजिस्ट्रेशन चुके हैं। 34 शहरों में आयोजित किए जा रहे इस प्रोग्राम में पहले बैच की ट्रेनिंग प्रारंभ हो चुकी है। 30 से 80 साल तक के प्रतिभागी पूरे उत्साह से भाग ले रहे हैं। यह ट्रेनिंग प्रोग्राम उनका आत्मविश्वास बढ़ाने का माध्यम बन गया है।

पहले चरण के रजिस्ट्रेशन समाप्त हो गए हैं। दूसरे चरण में कुछ शहरों में रजिस्ट्रेशन दोबारा प्रारंभ होंगे। लगभग 3 महीने तक चलने वाले इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में 12000 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों गृहणियों को कंप्यूटर ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है।

ट्रेनिंग ले रहे वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि उन्हें इस ट्रेनिंग प्रोग्राम से रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को एक नई दिशा देने का मौका मिलेगा। वहीं अधिकांश गृहणियां ट्रेनिंग में बेसिक नॉलेज लेने के बाद कुछ नया काम शुरू करने का सपना संजो रही हैं। कुछ ऐसे ही प्रतिभागियों ने अपने अनुभव बताए।

इंटरप्रेन्योरशिप की सोच बनाना चाहती हूं

^झिझकके कारण कभी मैंने कंप्यूटर सीखने की पहल ही नहीं की। पति ने मुझे प्रोत्साहित किया। ट्रेनिंग लेकर मैं बहुत खुश हूं। इंटरप्रेन्योरशिप की भावना विकसित हो रही है। -नबनीता चौधरी, 45 वर्ष, रांची

करूंगा स्वयं का ऑनलाइन वर्क

^इसट्रेनिंग में इंटरनेट सीखकर स्वयं का ऑनलाइन काम आगे बढ़ाऊंगा। मैं फिजीकली चैलेंज्ड हूं तो चुनौतियां कुछ बढ़ जाती हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी के सहारे चुनौतियों को पार करना ही लक्ष्य है। -अखिलेश कुमार, 65 वर्ष, जयपुर

पोती से स्काइप पर चैट करूंगी

^बच्चेकॅरियर के कारण दूर चले गए हैं। बस यही सोचकर मैं भास्कर की कंप्यूटर ट्रेनिंग में चली आई, कि अब विदेश में रह रही अपनी पोती से स्काइप पर चैट करूंगी। इस ट्रेनिंग में आकर केवल कंप्यूटर सीखने को मिल रहा है, बल्कि नॉलेज भी बढ़ रही है। -श्रद्धा वर्मा, 67 वर्ष, जयपुर

घर बैठे नेट का सदुपयोग करूंगी

^39साल की उम्र में सुबह-सुबह तैयार होकर घर से निकलती हूं तो लोग अचरज भरी निगाहों से देखते हैं। मैं रोज ट्रेनिंग में आती हूं। कई रिश्तेदार विदेश में रहते हैं। कंप्यूटर सीखने के बाद उनसे संपर्क के साथ ही नेट बैकिंग, रेलवे रिजर्वेशन भी कर सकूंगी। -राखी कौर, 39 वर्ष, धनबाद

^मैंएलआईसी एजेंट हूं। बेटे को कंप्यूटर आता है, लेकिन वो मुझे सिखाने के लिए समय नहीं निकाल पाता। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम से मुझे आत्मविश्वास मिला है और इसने मुझे आईटी की दुनिया से जोड़ा है। अब मैं कस्टमर्स को ईमेल के जरिए सेवाएं दे सकती हूं। -मेघा देशपांडे, औरंगाबाद