राजीव सिन्हा } 9135421800 धनबाद
शहर के स्टेशन रोड में विगत कुछ माह से रात के समय में अलग-अलग ट्रेनों से समूह में संदिग्ध लोगों के आने की बात भी प्रकाश में आई है। दर्जनों की संख्या में अलग-अलग ट्रेनों से लोग समूह में धनबाद आते हैं। ऐसे समूह में आनेवाले लोग स्टेशन रोड में पहले से खड़े खास ऑटो से प्रस्थान कर जाते हैं। ये कौन हैं और इतनी तादाद में धनबाद के किस स्थान पर जाते हैं, इसकी जानकारी किसी को नहीं होती है।
राजीव सिन्हा } 9135421800 धनबाद
कोयलेकी राजधानी कही जानेवाले धनबाद की सड़कों पर इन दिनों बगैर नंबर और पुलिस, प्रेस लिखे वाहनों की तादाद काफी बढ़ गई है। ऐसे वाहनों का उपयोग अपराधी और असामाजिक तत्व गलत मंसूबे के लिए कर सकते हैं। जिला यातायात विभाग और जिला परिवहन विभाग की निष्क्रियता हादसे का सबब बन सकता है। बाहर प्रांतों से अवैध सामान की आवाजाही तो बसों के माध्यम से लगातार जारी है। जबकि बगैर नंबर प्लेट और पुलिस, प्रेस लिखी हुई गाड़ियां भी खतरे की वजह बन सकती है। ऐसे में जिम्मेवारों की लापरवाही राज्य में अमन-चैन बनाए रखने के प्रयास को चोट पहुंचा सकती है। पश्चिम बंगाल के बर्दवान समेत रांची और जमशेदपुर से आतंकियों की विगत दिनों हुई गिरफ्तारी के बाद धनबाद जिला प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। जिले में कई स्थानों से देश और राज्य के लिए कोयला, बिजली जैसा जरूरी उत्पादन होता है। इसके अलावा कई प्रकार के रिसर्च सेंटर और विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों की मौजूदगी भी धनबाद को संवेदनशील बनाता है। जबकि वर्तमान में जिले के कई थाना क्षेत्र नक्सल प्रभावित भी माने जाते हैं। हालांकि निगरानी विभाग के सूत्र बताते हैं कि राज्य के रांची और जमशेदपुर जैसे शहर में लगातार गिरफ्तारी और निगरानी ने असामाजिक और अराजक तत्वों के मंसूबों को हिला दिया है। परन्तु सड़क और रेल मार्ग से देश के बाकी हिस्से में आने-जाने की सुविधा के दृष्टिकोण से जिले के संवेदनशील और संदिग्ध स्थानों पर पैनी नजर रखने की आवश्यकता है।
DB Star EXPOSE
जिले में बगैर नंबर वाले वाहनों की धरपकड़ के लिए यातायात पुलिस सक्रिय है। लगातार अभियान चलाया जा रहा है। कई वाहन को जब्त कर जुर्माना वसूला गया है। ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ और अधिक सख्ती बरती जाएगी। दूसरे राज्यों से आनेवाले वाहनों पर नजर रखी जा रही है। एकेतिर्की, डीएसपी ट्रैफिक, धनबाद
जिला में बाहर राज्य से आने वाले वाहनों की नियमित रूप से जांच की व्यवस्था नहीं है। जिससे उपद्रवी और अराजक तत्व का मनोबल बढ रहा है। यातायात पुलिस हरेक प्रकार के वाहनों की जांच के बजाय सिर्फ बाइक और ऑटो जांच में अपनी पूरी ताकत झोंक देती है। जबकि बीट पुलिस रात -दिन संदिग्ध वाहनों के स्थान पर माल लदे वाहनों पर ध्यान रखती है। शहर में अपराधी बेखौफ होकर काले शीशे वाले वाहनों से निडर होकर घूमते हैं। परन्तु पुलिस ऐसे वाहनों के प्रति लापरवाह दिखती है।
जिले की सड़कों पर इन दिनों कई प्रकार के बगैर नंबर वाले वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। इनमें पुलिस और प्रेस लिखे हुए वाहनों की भी तादाद काफी अधिक है। ऐसे वाहनों पर ना तो जिम्मेवार अंकुश लगा पा रहे हैं और ना ही पुलिस कार्रवाई कर रही है। जबकि इससे कभी भी गलत तत्व अपने नापाक इरादों को अंजाम दे सकते हैं। कई महत्वपूर्ण संस्थान समेत आम लोगों की भी सुरक्षा को खतरा हो सकता है। हाल ही में बर्दवान, रांची, जमशेदपुर जैसे शहरों से दबोचे गए आतंकियों की कार्यशैली से पता चलता है कि इन दिनों देश के छोटे-छोटे शहरों को अपना ठिकाना बना रखा है।
कोयलांचल की सड़कों पर बगैर नंबर वाले वाहनों की बढ़ती जा रही है तादाद