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बंगालीसमुदाय के ल

7 वर्ष पहले
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डीबी स्टार. धनबाद

हीरापुरस्थित तांत महल साड़ी सेंटर के ऑनर रंजीत कुमार बसाक कहते हैं कि दुर्गा पूजा में बंगाली समुदाय पारंपरिक कपड़े पसंद करता है। महिलाएं अलग-अलग पैटर्न वाली पारंपरिक तांत साड़ियों की डिमांड करती हैं। बनारसी, जामदानी और काथा स्टिच वाली साड़ियां भी पसंद की जाती हैं। बंगाली महिलाएं लाल और सफेद रंग की सिल्क और तांत की साड़ियां पहनना पसंद करती हैं। इस वर्ष खासकर दुर्गा पूजा के लिए सफेद और लाल रंग के डिजाइन वाली जामदानी (तांत सिल्क) साड़ियां आई हैं।


बंगालीसमुदाय के लिए दुर्गा पूजा साल का सबसे बड़ा उत्सव है, जिसका इंतजार समुदाय के हर व्यक्ति को रहता है। मां दुर्गा के प्रति प्रेम और सम्मान प्रकट करने का यह त्योहार सामूहिकता का भाव लिए होता है। यह पूजा व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से पंडालों में मनाई जाती है। बंगाली समुदाय की सारी एक्टिविटी दस दिनों के लिए पूजा पंडालों में सिमट जाती है। सब मां के करीब ज्यादा-से-ज्यादा समय तक रहना चाहते हैं। पितृ पक्ष खत्म होते ही महालया के साथ पूजा शुरू हो जाती है। इसे उद्‌बोधन कहते हैं। नौ दिनों तक मां के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। दसवें दिन \\\"पोरेर बोछोर आबार ऐशो मां\\\' के नारों के बीच मां को विदाई दी जाती है।

यूथ केलिए दुर्गा पूजा काफी महत्वपूर्ण है। आजकल युवाओं की लाइफ बेहद व्यस्त हो गई है। ऐसे में यही मौका होता है, जब परिवार और दोस्तों के साथ वक्त गुजारते और एंज्वाय करते हैं। यह पूरी तरह से सामूहिकता का त्योहार तो लोगों से मिलने जुलने का काफी मौका मिलता है। साथ ही परंपरा से भी जुड़ाव रहता है। - शांतनुगनाईं

परिवार का साथ

कम्यूनिटी वाला त्योहार

मां से मांगते हैं मुरादें

परंपरा से जुड़ाव

अच्छाई की जीत

दुर्गा पूजाका इंतजार बंगालियों को पूरे वर्ष रहता है। मां दुर्गा के मायके आगमन का पूरा समुदाय उत्सव मनाता है। मां दुर्गा के हाथों में जितने भी अलंकार हैं, वो देवताओं के दिए उनके शस्त्र हैं, जिनसे मां महिषासुर का वध करती हैं। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश है। - कल्पनामलिक, शास्त्रीयनृत्यांगना

इस त्योहार को लोग सामूहिकता में मनाते हैं और सब के साथ ही एंज्वॉय भी करते हैं। मां के सामने उसके सारे बच्चे अपने गिले-शिकवे भूल कर एक साथ उत्सव मनाते हैं। आजकल के दौड़-भाग के समय इस त्योहार के जरिए हमें दोस्तों और अपनों से जुड़ने का मौका मिलता है। -चंचल नियोगी

दुर्गा पूजाबंगाली समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसका इंतजार पूरे वर्ष रहता है। सब इंतजार करते हैं कि मां से अपनी मुरादें मांगेंगे। लोग मां से शक्ति, परिवार की सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। मां के आगमन से ही पूरा वातावरण पवित्र और आध्यात्मिकता से भर जाता है। - अंजलिनियोगी

दुर्गा पूजाहम बंगालियों के लिए ऐसा अवसर है, जब दूर-पास के सभी रिश्तेदार एक जगह इकट्ठा होते हैं। सालभर कोई