पैंट्री कार से लोगों को किसी तरह खाना और नाश्ता तो मिल जा रहा था, लेकिन बच्चों को पीने के लिए दूध नसीब नहीं हो रहा। घर से महिलाएं जो दूध लेकर चली थीं, वह फट गया था। बच्चे दूध के लिए बिलख रहे थे। माताएं उन्हें शांत करने में कोशिश कर रही थीं।
किसी यात्री को
कोलकाता में डॉक्टर से दिखाना था, तो किसी को दफ्तर या अन्य जरूरी काम से सुबह कोलकाता पहुंचना था। ट्रेन की लेटलतीफी के कारण यात्री काफी आक्रोशित थे। तड़के 3:15 बजे धनबाद पहुंचने वाली ट्रेन दिन के 1:15 बजे पहुंची।
देर रात से सुबह आठ बजे तक ट्रेन जहां-तहां घंटों रुक रही थी। कुहासे की वजह से कुछ भी नहीं दिख रहा था। कहां कितनी देर तक ट्रेन रुकी रही , कहना मुश्किल है। हावड़ा जाकर सिलीगुड़ी जाने में परेशानी होगी। हावड़ा जाने के बाद ही पता चलेगा कि कौन-सी ट्रेन सिलीगुड़ी के लिए मिलेगी। -आनंदी दम
ठंड से ट्रेन काफी लेट हो गई, जिससे हमें नुकसान हो गया। हावड़ा जाकर सिलीगुड़ी के लिए शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन पकड़नी था, जो दिन के ढाई बजे खुलती है। यह ट्रेन छूट जाएगी। रेलवे सही समय पर ट्रेन नहीं चला पा रही है, कुहासा से निबटने के लिए रेलवे की तैयारी फेल हो गई है। -एसी दम
इमरजेंसी काम की वजह से दिल्ली से ट्रेन पकड़ कर हावड़ा जा रहे थे। ट्रेन लेट होने से सारा कार्यक्रम बिगड़ गया। गुरुवार को दोपहर में जरूरी काम था, पर वह नहीं हो पाएगा। ट्रेन के देर होने की वजह से कई लोगों के साथ परेशानी है। कुहासे के कारण ट्रेन जहां-तहां घंटों खड़ी रही। इससे निबटने के लिए रेलवे को उपाय करना चाहिए।
-अंशुमन तिवारी