धीरेन रवानी को हाई कोर्ट से राहत नहीं
फ्लैश बैक
रेनबोनन-बैंकिंग कंपनी के डायरेक्टर धीरेन रवानी की जमानत याचिका हाई कोर्ट से नामंजूर हो गई। गुरुवार को जस्टिस प्रशांत कुमार की अदालत में बेल पिटिशन नंबर 7911-14 पर धीरेन रवानी की जमानत पर सुनवाई हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज की। इस मामले में धीरेन रवानी 24 अगस्त 2014 से जेल में हैं।
आरबीआई के नियमों का उल्लंघन कर अपना स्कीम चलाने के मामले में धीरेन रवानी के खिलाफ बैंकमोड़ थाने में चिटफंड मनी सर्कुलेशन स्कीम (बैगिंग) 1978 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी। बैंक मोड़ थाना के निरीक्षक निजामुद्दीन की शिकायत पर रेनवो कंपनी के डायरेक्टर धीरेन रवानी, प्रबंधक सुभाष चंद्र दे, एडीएम तारकनाथ दे, नंदलाल दास, मनोज सिंह एवं ओम शंकर ठाकुर के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।
2005 में भी धीरेन रवानी पर बैंक मोड़ थाने में धोखाधड़ी जालसाजी करने का आरोप लगा था। प्रकाश साव के बयान पर रवानी पर केस हुआ था। इसमें धीरेन रवानी निशांत आईटी सर्विसेज कंपनी चलाता था। वह भोली-जनता को झांसा देकर रुपए डबल करने का भरोसा दिलाकर कंपनी में रुपया जमा कराता था। इसमें धीरेन पर करोड़ों रुपए का बारा न्यारा करने का आरोप लगा था। इसमें 14 सितंबर 2006 को न्यायिक दंडाधिकारी एके मिश्रा की अदालत ने धीरेन रवानी को धारा 406, 420 में तीन वर्ष पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई थी। धीरेन ने निचली अदालत के आदेश को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में चुनौती दी थी। 28 अगस्त 2014 को अदालत ने सजा को बहाल रखते हुए धीरेन रवानी की अपील याचिका खारिज कर दी थी।