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गवेंद्र मिश्रा . 9608469168

6 वर्ष पहले
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पहले बैट्रियां चोरी हुईं, फिर पहिए और स्टेयरिंग

स्टैंडमें खड़ीं 65 बसों में से आज एक भी सही-सलामत नहीं हैं। सबसे पहले उनकी बैट्रियां और सीट गायब हुईं। पूछने पर अफसरों ने कहा कि कुछ बैट्रियां उनके पास हैं और बाकी चोरी हो गईं। हालांकि भास्कर की पड़ताल में पता चला कि अधिकतर बैट्रियां अफसरों की शह पर निगमकर्मियों ने ही बेच खाईं। धीरे-धीरे बसों के पहिए गायब होते गए। अब बसों की स्टेयरिंग भी काट कर गायब की जा रही हैं। अफसरों की नीयत इसी से समझी जा सकता है कि उन्होंने कभी चोरी की शिकायत थाने में दर्ज
गवेंद्र मिश्रा . 9608469168

सिटीबस सर्विस के नाम पर धनबाद नगर निगम ने पिछले पांच वर्षों में जनता के 6.4 करोड़ रुपए बर्बाद कर दिए। निगम बोर्ड के गठन के बाद अक्टूबर 2010 में इस राशि से 70 बसें खरीदी तो गईं, पर उनका लाभ शहरियों को नहीं मिला। पहले तो पांच बसें देवघर नगर निगम को दे दी गईं, अौर फिर लापरवाह अफसरों ने बाकी बसों को सड़ने के लिए छोड़ दिया। बीच में झारखंड पर्यटन विकास निगम (जेटीडीसी) ने 15 बसें चलाईं, लेकिन पिछले छह माह से सिटी बस सर्विस पूरी तरह ठप पड़ी है। अब 65 बसें बरटांड़ के बस स्टैंड में पड़ी-पड़ी सड़ रही हैं। हद तो यह है कि निगम में शहरवासियों का प्रतिनिधित्व करनेवाले वार्ड पार्षदों ने कभी इस मुद्दे पर गंभीरता से प्रयास ही नहीं किया। जनता के करोड़ों रुपए बर्बाद करनेवाले अफसरों पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

उठ रहे ये सवाल



>6.4 करोड़ रुपए की बसों से नगर निगम को एक रुपए की भी आमदनी क्यों नहीं हुई‌?

> अगर पहले साल में आमदनी नहीं हुई, तो अगले साल परिचालन की व्यवस्था क्यों नहीं बदली गई?

> धनबाद में 65 बसें नहीं चल पाईं, पर 5 बसें देवघर में कैसे चल रही हैं?

> जेटीडीसी ने जितने दिन बसें चलाईं, उसकी आमदनी कहां गई?

> बैठकों में बेंच पर खड़े होकर हंगामा मचाने वाले वार्ड पार्षदों ने इस समस्या पर चुप्पी क्यों साधे रखी?

हर प्रयास रहा विफल

बरटांड़ बस स्टैंड में खड़ीं सिटी बसें।

निगम के अफसरों ने बसों को ठेके पर चलाने के लिए कई बार टेंडर निकाला। एक में शर्त रखी गई कि ठेकेदार को हर बस के हिसाब से निगम को हर दिन 500 रुपए देने होंगे। किसी ठेकेदार को यह शर्त मंजूर नहीं हुई। निगम ने फिर जर्जर हो चुकी बसों के मरम्मत के लिए पिछले दिसंबर में 88 लाख रुपए का टेंडर निकाला, लेकिन इसमें भी किसी ठेकेदार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। नगर विकास विभाग के स्तर से बस परिचालन के लिए तमाम सहूलियतें ऑफर की गईं, फिर भी कोई एजेंसी बस चलाने को तैयार नहीं है।

^सिटी बसों की रिपेयरिंग के लिए एक बार फिर टेंडर निकाला जाएगा। टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अगर इस बार भी टेंडर में कोई कंपनी नहीं आती है, तो इसकी लिखित सूचना सरकार को दे दी जाएगी।\\\'\\\'

-सिद्धार्थशंकर चौधरी, प्रभारीनगर आयुक्त

70 बसेंखरीदी गई थीं अक्टूबर 2010 में

15बसोंको कुछ दिन जेटीडीसी ने चलाया

05बसेंदेवघर भेज दी गईं

कमाई ढेला नहीं और सड़ा डालीं 65 बसें

नाकामी| सिटी बस सर्विस के नाम पर नगर निगम के अफसरों ने बर्बाद कर डाले 6.4करोड़ रुपए