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नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ जितिया का अनुष्ठान

7 वर्ष पहले
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पुत्रकी लंबी आयु के लिए किया जाने वाला जितिया व्रत सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। मंगलवार को माताएं निर्जला उपवास रख कर अपने पुत्र की सलामती की दुआ करेंगी। जितिया को लेकर घरों में उत्सवी माहौल था। माताएं दिन भर व्रत की तैयारी में जुटी हुई थी। व्रत को लेकर बाजार में काफी चहल-पहल रही। जिऊतिया गुथवाने से लेकर मडुआ का आटा, नोनी का साग, सतपुतिया झिंगनी, कंदा, कोहड़ा, मकई का बाल, खीरा समेत अन्य फलों की खरीदारी के लिए महिलाओं भीड़ लगी हुई थी। सभी अपनी आवश्यकता अनुसार समानों की खरीदारी में व्यस्त रही। खरीदारी का काम पूर्ण होने के बाद शाम में व्रती महिलाओं ने स्नान ध्यान कर जिउतवाहन की आराधना की। इसके बाद शुरू हुआ सरगही का दौर। पंडित आशुतोष तिवारी के अनुसार व्रती माताओं के लिए सरगही का मौका रात 3. 30 बजे तक था। व्रती माताएं बुधवार को सूर्योदय के बाद पारन कर सकती है।



कैसे करें पूजा : पवित्र होकर संकल्प के साथ व्रती प्रदोषकाल (शाम को) में गाय के गोबर से अपने आंगन लीपे या छत की ठीक से सफाई करें। किसी तरह से एक छोटा-सा तालाब बना लें। तालाब के निकट पाकड़ की डाल लाकर खड़ा कर दें। शालिवाहन राजा के पुत्र जीमूतवाहन की कुशनिर्मित मूर्ति मिट्टी के बर्तन में स्थापित कर पीली और लाल रुई से सजाएं तथा धूप, दीप, चावल, फूल, माला एवं विविध प्रकार के नैवेद्यों से पूजन करें। मिट्टी गाय की गोबर से चिल्हो (मादा चील) सियारिन की मूर्ति बनाकर उनके मस्तकों को लाल सिंदूर से सुशोभित करें। अपने वंश की वृद्धि और प्रगति के लिए बांस के पत्तों से पूजन करना चाहिए। इसके बाद व्रत की कथा सुनें। अपने पुत्र-पौत्रों की लंबी आयु एवं सुंदर स्वास्थ्य की कामना से महिलाओं को यह व्रत अवश्य करना चाहिए।

^नहाय खाय के साथ जिऊतिया का अनुष्ठान शुरू हो गया है। आज सर्वार्थ सिद्धि योग था। मंगलवार को दिन-रात अमृत सिद्धियोग है। इस बार व्रत विशेष फलदायी है। निर्जला उपवास रख जिऊतवाहन की पूजा करने वाली माताओं की मनोकामना अश्वय पूर्ण होगी। -पंडित आशुतोष तिवारी

कतरास बाजार मेें बिक्री के लिए रखा सतपुतिया।

नहाय-खाय के साथ कतरास कोयलांचल में जितिया शुरू

कतरास | सोमवारको नहाय-खाय के साथ जीवित पुत्रिका (जितिया) पर्व शुरू हो गया। मंगलवार को महिलाएं अपने पुत्र के दीर्घायु की कामना लेकर दिन रात निर्जला उपवास रखेंगी। बुधव