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उच्च शिक्षा में मालवीय जी का अहम योगदान : मित्रा

7 वर्ष पहले
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भारतमें उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पंडित मदन मोहन मालवीय का योगदान महत्वपूर्ण है। युवाओं को उन्हें अपना आदर्श बनाना चाहिए। ये बातें भाजपा नेता और राज्यसभा सदस्य चंदन मित्रा ने मंगलवार को कहीं। वे आईएसएम के गोल्डन जुबली हॉल में पंडित मदन मोहन मालवीय पर आधारित वर्कशॉप और लेक्चर सीरीज के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मालवीय सबसे पहले पंडित धर्म निभाते थे, उसके बाद वे समाज स्तर पर सनातन धर्म, देश स्तर पर हिन्दू धर्म और विश्व स्तर पर मानव धर्म के पक्षधर थे। समारोह के विशिष्ट अतिथि स्थानीय सांसद पीएन सिंह ने कहा कि देश में उच्च शिक्षा के विकास में पंडित मदन मोहन मालवीय और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय का अहम योगदान है। उन्होंने साथ ही चिंता जताई कि आजादी के वक्त देश की जो साक्षरता दर (7 फीसदी) थी, वह आजादी के बाद प्रति वर्ष सिर्फ एक फीसदी की दर से बढ़ी। समारोह में प्रो जेके पटनायक, डॉ प्रमोद पाठक, जेएसपीएल के वाइस प्रेसिडेंट पीबीके चरण, सौम्या सिंह, प्रो आर वेणुगोपाल आदि ने भी अपनी बात रखी।

सामाजिक मूल्यों की स्थापना के लिए अहम प्रयास

लेक्चर सीरीज के समापन समारोह में पंडित मदन मोहन मालवीय पर लिखी किताब इन्वेंटिंग सोसाइटी सर्च ऑफ पाराडिज्म का लोकार्पण भी किया गया। यह किताब आईएसएम के डॉ प्रमोद पाठक ने तैयार की है। इसका प्रकाशन मैकमिलन की ओर से किया गया है।

मालवीय जी पर लिखी किताब का लोकार्पण

लेक्चर सीरीज के संयोजक डॉ प्रमोद पाठक ने बताया कि वर्ष 2012 में पंडित मदन मोहन मालवीय की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आईएसएम के मैनेजमेंट स्टडीज डिपार्टमेंट की ओर से यह आयोजन किया गया था। पिछले दो वर्षों के दौरान तीन लेक्चर सीरीजों के आयोजन का उद्देश्य सामजिक मूल्यों की पुनर्स्थापना है। डॉ पाठक ने कहा कि मालवीय जी का नारा था - मुझे ही राज्य चाहिए और ही स्वर्ग, सिर्फ अपने लोगों का उत्थान चाहिए।

आईएसएम के गोल्डन जुबली हाॅल मंे वर्कशॉप के दौरान सांसद पीएन सिंह अन्य तथा इनसेट में अपनी बात रखतीं छात्राएं।