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बसंत विश्वकर्मा . तिसरा

7 वर्ष पहले
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बसंत विश्वकर्मा . तिसरा

लाखोंरुपए खर्च कर अस्पताल के लिए भवन बनाया गया, पर 10 साल बाद भी उसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। मुकुंदा उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन उद्‌घाटन के इंतजार में खंडहर में तब्दील बनता जा रहा है। इसके चारों तरफ बड़ी-बड़ी झांडियां भर गई हैं। रात में यह भवन डरावना नजर आता है। यह अपराधियों के लिए शरणस्थली बन गया है। स्थानीय लोगों ने इस मामले पर कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, पर इससे कोई फायदा नहीं हुआ। मुकुंदा उप स्वास्थ्य केंद्र को फिलहाल कुसमटांड़ के पंचायत भवन में चलाया जा रहा है। ज्यादा-से-ज्यादा लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए जगह-जगह उप स्वास्थ्य केंद्र बनाने की स्वीकृति दी थी। मुकुंदा का चयन भी इस योजना के लिए किया गया था। तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद मुकुंदा के कालीटांड़ विद्यालय के पास करीब 10.50 लाख रुपए की लागत से भवन निर्माण का काम शुरू किया गया। निर्माण की जिम्मेवारी धनबाद एनआरईपी को सौंपी गई थी। भवन तय समय पर बनकर तैयार हो गया और उसे स्वास्थ्य विभाग के हवाले कर दिया गया। विभाग ने भवन के मुख्य दरवाजे पर अपना ताला लगा दिया। लोगों को लगा कि अब इस नए भवन में उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी, पर उनका इंतजार 10 साल से भी ज्यादा लंबा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने उस भवन का इस्तेमाल करने के लिए अब तक कुछ नहीं किया।

जब मुकुंदा उप स्वास्थ्य केंद्र के भवन के बारे में झरिया/जोड़ापोखर स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सक डाॅ शशिभूषण प्रसाद से दूरभाष पर पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यह केंद्र उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इस मुद्दे पर वरीय अधिकारी ही कुछ कह सकेंगे। इधर, सिविल सर्जन अरुण कुमार सिन्हा से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि वे जिले से बाहर हैं। लौटने पर ही कुछ बता पाएंगे।

कुछ नहीं बता रहे अधिकारी

मुकुंदा के बसंत मुखर्जी, प्रेम साव, दीपक कुमार, रामचंद्र साव आदि का कहना है कि उप स्वास्थ्य केंद्र के लिए भवन जिस जगह पर बनाया गया है, वह घनी आबादी वाले इलाके से काफी दूर है। भवन को जंगल-झाड़ के बीच बना दिया गया है। वहां पहुंचना काफी मुश्किल है। खासकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर काफी चिंता रहती है। अफसरों ने बिना ग्रामीणों की सुविधा का ख्याल रखे भवन बनवा लिया और अब उसका इस्तेमाल भी नहीं कर रहे।

मुकुंदा और आसपास