नगर निगम और बिजली विभाग को लाखों का चूना
राजीव सिन्हा . 9135421800धनबाद
शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान अपने चरम पर है। परन्तु हाउसिंग कालोनी के कई मकानों पर दबंगों ने नियम कानून को दरकिनार कर अतिक्रमण कर लिया है। जहां से निडर होकर अपने व्यवसायिक गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं। कुछ लोगों ने अपने आवासों को किराए पर दे रखा है। जहां पर ठग और अवैध धंधेबाजों ने अपना सेंटर खोल रखा है और भोले-भाले युवक-युवतियों को नौकरी और उच्च शिक्षा देने के नाम पर लगातार झांसा दे रहे हैं। कई प्रकार के अवैध धंधों का संचालन सेंटर के तौर पर तब्दील हो चुके कालोनी में सीधे-साधे परिवार के लोगों का रहना दिनों दिन मुश्किल होता जा रहा है। कालोनी के लोगों का कहना है कि आवास लेते वक्त किए गए एग्रीमेंट में स्पष्ट था कि आवास का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जाएगा और किराए पर नहीं दिया जा सकता है। मगर, कई प्रकार के संदिग्ध चरित्र वाले लोग किराए पर आवास लेकर अपने गलत धंधे का संचालन कर रहे हैं। हाउसिंग कालोनी में खुली कई कंपनियां जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपए ठग कर फरार हो चुके हैं। जबकि, कई जाल बिछाए हैं। हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों और कर्मियों को इन सारी बातों की बखूबी जानकारी रहती है। फिर भी जिम्मेवार ऐसे गलत लोगों के खिलाफ जरूरी कदम उठाने से बचते हैं। लोग कहते हैं कि इन दबंगों के इशारे पर ही हाउसिंग बोर्ड के कर्मी काम करते हैं। इस कारण कालोनी के संभ्रांत परिवार के सदस्यों में हमेशा भय और दहशत बना रहता है। कालोनी के स्थानीय लोगों की शिकायत पर डीबीस्टार की टीम ने कालोनी के कई आवासों का जायजा लिया। प्रस्तुत है एक रिपोर्ट।
आवासों में व्यावसायिक सेंटर खुल जाने से उक्त फ्लैट में रहनेवाले अन्य लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। क्योंकि ऐसे सेंटरों में कई तरह के लोगों का आना-जाना लगातार बना रहता है। जिससे अन्य लोगों को परेशानी होती है और परिवार की सुरक्षा का खतरा बना रहता है। हालांकि लोगो का कहना है कि ऐसे केन्द्र पर आने वाले कुछ लोग आसपास की महिलाओं और युवतियों से छेड़खानी भी करते हैं।
आवासों में कई चिकित्सक निजी तौर पर कमाई करने के लिए क्लीनिक और लैब का संचालन कर रहे हैं। ऐसे में वहां के बायोवेस्ट को कालाेनी के खाली जगह पर खुले में फेंका जाता है। इससे आसपास के लोगो में संक्रमण होने का खतरा बढ़ गया है। जबकि डाक्टरों ने आवास का आवंटन क्लीनिक चलाने के लिए नहीं अपितु रहने के लिए करा रखा है।
हाउसिंग कालोनी के कई आवासों में खुले तौर पर व्यावसायिक केन्द्र संचालित हो रहे हैं। जबकि उक्त भवन का उपयोग सिर्फ रिहायश के लिए किया जा सकता है। आवास में लगे पानी, बिजली, रेंट जैसे मद में सरकारी राजस्व का निर्धारण डोमेस्टिक दर पर किया जाता है। लेकिन दबंग इसका व्यावसायिक इस्तेमाल कर सरकार के राजस्व की चोरी कर हैं। इसमें हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों की मिलीभगत है।
हाउसिंग कालोनी में कई दबंग लोगों ने मनमानी कर सड़कों पर अतिक्रमण कर रखा है। कुछ ने गैरेज तो कइयों ने दुकान और कहीं-कहीं पर जेनरेटर रूम बना लिए गए है। जबकि कइयों ने तो बगैर आवंटन के आवासों पर कब्जा कर लिया है। खानापूर्ति करने के लिए जिम्मेवार कुछ अंतराल पर अभियान जरूर चलाते हैं, लेकिन फिर सब कुछ पुराने ढर्रे पर ही चलने लगता है। कई जगहों पर तो लोगों ने सार्वजनिक नालों के ऊपर कब्जा कर अवैध निर्माण तक कर रखा है।
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद शहर में चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान में मेन रोड और बाजारों से अवैध कब्जा हटाने की गतिविधियां पूरे जोरों पर है। जबकि हाउसिंग कालोनी के सरकारी भूखंडों को अपनी समझने वाले मंत्री-संतरी को नजरअंदाज किया जा रहा है। सरकार ने हाउसिंग कालोनी का निर्माण कर लोगों को रहने के लिए आवास और भूखंड आवंटित किया था। परन्तु जिम्मेवारों की लापरवाही और नाजायज कमाई के लोभ ने पूरे हाउसिंग कालोनी को बिजनेस हब बना दिया है। इससे कई आवासों में रहनेवाले परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कमाई के लिए हाउसिंग कालोनी को बना दी कामर्शियल कालोनी
DB STAR EXPOSE
कई आवासों से संचालित होने वाले कमर्शियल सेंटर के संचालक निगम और बिजली विभाग को मासिक रेंट घरेलू दर पर भुगतान करते हैं। जबकि व्यवस्था का उपभोग कमर्शियल तौर पर किया जा रहा है। ऐसे में उक्त विभागों को प्रति माह लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। जबकि विभाग के कुछ कर्मियों की मिलीभगत से ऐसा करना संभव हो रहा है।