न्याय का बड़ा प्लेटफाॅर्म बनीं लोक अदालतें
अदालतोंमें जजों समेत न्यायिक अधिकारियों की कमी और मुकदमों की बढ़ती संख्या से हर कोई परेशान है। जल्द न्याय की उम्मीद में हजारों लोग वर्षों से कोर्ट के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। ऐसे लोगों के लिए लोक अदालत न्याय का एक बड़ा प्लेटफाॅर्म बनती जा रही है। देश के अन्य शहरों की तरह धनबाद के लोगों के लिए भी यह बड़ा प्लेटफाॅर्म बन गई है। लोक अदालतों में पिछले एक साल के दौरान 2362 मुकदमों का निपटारा हुआ है, वह भी बिना किसी तरह के खर्च के। 8 करोड़ रुपए की रिकवरी की गई। लोक अदालत छुट्टी के दिन यानी हर शनिवार को आयोजित की जाती है।
मुआवजा और हर्जाना तुरंत मिल जाता है।
किसी पक्ष को नहीं होती सजा।
कोर्ट फीस भी नहीं जमा करनी पड़ती है।
वकील को फीस नहीं देनी पड़ती है।
वादी को इस तरह होता है फायदा
जनवरी में निष्पादित मामले
केसनिष्पादित केस सैटल्ड एमाउंट रिकवर एमाउंट
मोटर दुर्घटना 4 14,95,000 14,95,000
विद्युत एक्ट 55 3,02,000 3,02,000
जीआर, सीपी 27 - - - -
फॉरेस्ट एक्ट 1 5,000 5,000
एक्साइज एक्ट 4 34,700 34,700
रेलवे एक्ट 64 35,450 35,450
बैंक लोन 99 35,20,905 5,57,153
बीएसएनएल केस 60 1,34,101 1,07,516
30 हजार केस पेडिंग
धनबादसिविल कोर्ट में 30 हजार से अधिक केस पेडिंग हैं। कोर्ट की संख्या 40 है। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, सेशन कोर्ट के अलावा न्यायिक दंडाधिकारियों की अदालत में भी लंबित मुकदमों की लंबी फेहरिस्त है। न्यायिक अधिकारियों की कमी के कारण काम बाधित होता है। मुकदमों की संख्या के अनुपात में लोगों को जल्दी न्याय नहीं मिल पा रहा है। इस कारण लोग समझौते, बातचीत आदि के आधार पर निबटाए जा सकने वाले मामले लोक अदालतों में ले जा रहे हैं।
समझौते या बातचीत से होता है निष्पादन
लोकअदालत में अधिकतर वैसे मुकदमे आते हैं, जिनका निबटारा समझौते के आधार पर या दोनों पक्षों से बातचीत कर संभव है। इनमें बैंकिंग, जमीन, श्रम, फैमिली केस, एमएसीटी, पब्लिक यूटिलिटी जैसे- बिजली, पानी, टेलीफोन, नीलामपत्र वाद आदि समेत कई आपराधिक मामले शामिल हैं। गौरतलब है कि धनबाद में लोक अदालतें पहले भी लगती रही हैं, पर उनमें ज्यादा मामले निष्पादित नहीं हो पाते थे।
^लोक अदालत में बहुत सारे मामलों का निष्पादन हो रहा है। इससे अदालतों में वादों का बोझ भी कम हो रहा है। आमलोगों खास कर गरीबों को काफी राहत मिल रहा है। सुलह के कारण आपसी दुश्मनी से संबंधित मामलों में भी कमी रही है।’’ अंबुजनाथ, अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण