जैसे हो वैसे दिखो, पहनो नहीं नकाब...
जैसेहो वैसे दिखो, पहनो नहीं नकाब, कांटों का भी घर मिले बन कर रहो गुलाब, दिल को छू जाने वाली यह प्रस्तुति ने श्रोताओं के अंतर्मन को झकझोर दिया। कानपुर से आए कवि सह साहित्यकार डाॅ सुरेश अवस्थी ने अपनी इसी रचना से कवि सम्मेलन की शुरुआत की। मौका था हिन्दी साहित्य विकास परिषद के 35वें स्थापना दिवस सह सम्मान समारोह का। रविवार को इसका आयोजन इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स एसोसिएशन के सभागार में किया गया था। इस मौके पर कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया, जिसमें देश के अलग-अलग क्षेत्रों से कवि पहुंचे थे।
सभी ने अपनी कविताओं से केवल श्रोताओं को गुदगुदाया, बल्कि उन्हें देश की हालत से भी अवगत कराया। सियासत के खेल को भी उजागर किया गया। कविताओं की स्वर लहरी को आगे बढ़ाते हुए सुरेश अवस्थी ने कहा कि मुंह खोले मिसिरी झरे, भीतर धरे बिलेड मौका पाते गपक ले एबीसीडी जेड। गुड़गांव से आए डॉ गिरिराज शरण अग्रवाल ने अगर संकल्प हो मन में, अगर चलने का साहस हो, अंधेरे में कदम मंजिल का रास्ता ढूंढ लेते हैं।
इस कविता को भी लोगों ने खूब सराहा। अशोक सुंदरानी और महेश मेहंदी ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मनोरंजन किया। मध्यप्रदेश से आए संदीप शर्मा ने अश्लीलता पर प्रहार करते हुए लोगों से कहा कि जिस दिन लोग अश्लीलता के विरुद्ध मन बना लेंगे यह गंदगी समाप्त हो जाएगी। अलीगढ़ की कीर्ति माथुर ने बंधी है आज पैरों में तुम्हारे प्यार की पायल, तड़प सुनकर पपीहे की उमड़ आया है बादल, बिना तेरे कैसे रहूं, कैसे बता दे, जल मेरी पलको में बस जाना तू बन के आंख का काजल। कीर्ति की इस प्रस्तुति पर पूरा हॉल तालियों की गड़ गरगराहट से गूंजा उठा। वाराणसी से आए भूषण त्यागी ने श्रोताओं में देशभक्ति का जज्बा भर दिया।
परिषद ने किया दो कवियों को सम्मानित
कविसम्मेलन के पूर्व परिषद की ओर से कानपुर के डॉ सुरेश अवस्थी और गुड़गांव से आए डॉ गिरिराज शरण अग्रवाल को हिन्दी सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके बाद समाज सेवा के क्षेत्र में बेहतर काम कर रहे कतरास के रामावतार खेमका को समाज सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया। समारोह का उद्घाटन समाजसेवी केदारनाथ मित्तल ने किया। परिषद के सचिव दिलीप चंचल ने संस्था की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। आए हुए अतिथियों का स्वागत अनंतनाथ सिंह ने किया। समारोह की अध्यक्षता डॉ श्रीराम दुबे कर रहे थे। सम्मान सम