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धनबाद। धनबाद रेल मंडल की रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स (आरपीएसएफ ) के कमांडेंट शांति प्रकाश वशिष्ठ को धनबाद सीबीआई ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। कमाडेंट स्टेशन रोड स्थित अपने आवास में कांस्टेबलों मुकेश कुमार और पीके कायल से 10-10 हजार रुपए घूस लेते रंगेहाथों पकड़े गए। शाम 6:15 बजे कांस्टेबलों ने जैसे ही रुपए दिए, सीबीआई अधिकारियों ने उन्हें धर दबोचा। धुलवाने पर रुपयों में रसायन से कमांडेंट की हथेली रंगीन हो गई। सीबीआई ने फिर उनके आवास का कोना-कोना छान मारा।
सीबीआई अफसरों के मुताबिक, दोनों कांस्टेबलों से एरियर बिल और सैलरी भुगतान के लिए 10-10 हजार मांगे थे। सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद उसका सत्यापन कराया। फिर सीबीआई एसपी पीके मांजी ने अपने नेतृत्व में टीम गठित की। इधर, कमांडेंट ने रविवार की शाम कांस्टेबलों को घूस की राशि लेकर अपने आवास में बुलाया था। सीबीआई ने योजना के मुताबिक, दोनों कांस्टेबलों को रसायन लगे नोट देकर कमांडेंट के पास भेजा। इसके बाद जाल बिछाकर कमांडेंट को घूस लेते पकड़ लिया।
असम और न्यू जलपाईगुड़ी के भी प्रभार में हैं वशिष्ठ
वशिष्ठ ने 2013 में धनबाद स्थित आरपीएसएफ की 10वीं बटालियन के कमांडेंट के रूप में योगदान दिया था। वे साथ ही लामडीह (असम) स्थित आरपीएसएफ की पहली बटालियन और न्यू जलपाईगुड़ी स्थित चौथी बटालियन के कमांडेंट के भी प्रभार में हैं। ट्रेनों में एस्कॉर्ट करती है आरपीएसएफ आरपीएसएफका काम ट्रेनों में एस्कॉर्ट करना है। आरपीएसएफ को एफआईआर करने या फिर धरपकड़ का अधिकार नहीं है। धनबाद स्थित 10वीं बटालियन की पांचों कंपनियों के अधिकतर जवानों की ड्यूटी धनबाद रेल मंडल के बाहर लगाई गई है। अधिकसंपत्ति मिली तो दर्ज होगा एक और केस सीबीआईको आवास में छापेमारी के दौरान कई बैंक पासबुक और निवेश के दस्तावेज मिले हैं। अगर कमांडेंट की वास्तविक आय से अधिक की संपत्ति मिली, तो घूसखोरी के अलावा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का भी मामला दर्ज किया जाएगा। कांस्टेबल मुकेश कुमार पीके कायल ने रेलवे के प्री मेडिकल एक्जामिनेशन में भाग लेने के लिए छुट्टी ली थी। ड्यूटी पर लौटने के बाद दोनों ने लीव पीरियड को रेगुलराइज करने, एरियर तथा सैलरी भुगतान के लिए कमांडेंट के पास आवेदन किया था। आवेदन पर हस्ताक्षर करने के एवज में कमांडेंट ने दोनों से 10-10 हजार की घूस मांगी थी। लटका रखा था पीएमई लीव पीरियड का बिल आरपीएसएफ के दो कांस्टेबलों ने कमांडेंट की सीबीआई से शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि एरियर और सैलरी भुगतान के एवज में उनसे 10-10 हजार रुपए की घूस मांगी जा रही है। शिकायत की जांच के बाद सरकारी आवास से ही घूस लेते कमांडेंट को रंगेहाथ पकड़ा गया। -पीके मांझी, एसपी,सीबीआई (धनबाद)
(आरपीएसएफ कमांडेंट वशिष्ठ लाल घेरे में। )
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