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प्रश्नपत्र ताले में बंद, अफसरों ने किया दावा- हो गई परीक्षा

5 वर्ष पहले
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जिलेके सरकारी हाई स्कूलों में मूल्यांकन परीक्षा के नाम पर भारी मजाक किया गया है। 118 में से 11 स्कूलों के प्रश्न पत्र ताले में बंद पड़े रहे, लेकिन जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) दावा कर रहे हैं कि सभी स्कूलों में परीक्षा हुई। उन्होंने राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) को इस बारे में झूठी रिपोर्ट भी भेज दी। यही नहीं, मूल्यांकन परीक्षा के नाम पर जिले को आवंटित किए गए फंड की बंदरबांट भी कर ली गई। जब डीईओ को हकीकत बताई गई, तो वे अपने मातहतों पर जिम्मेवारी थोपने लगे। मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में गलत जानकारी दी गई। मैं जांच करूंगा और जो दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यहहै मामला

आरएमएसएके तहत 25 से 30 जनवरी के बीच जिले के 118 सरकारी हाई स्कूलों में 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की जानी थी। बाकी स्कूलों में तो परीक्षाएं हुईं, लेकिन 11 स्कूलों में प्रश्न पत्र ही नहीं भेजे गए। वे अब भी स्टेट लाइब्रेरी के कंप्यूटर कक्ष में पड़े हैं। दूसरी ओर, जिला शिक्षा विभाग के अफसरों ने सभी स्कूलों में परीक्षाएं आयोजित कर लेने की फर्जी रिपोर्ट अभियान कार्यालय को भेज दी। प्रश्न पत्र छपवाने से लेकर परीक्षा के आयोजन तक पूरी जिम्मेवारी डीईओ की थी।

हमारे स्कूल में 25 से 30 जनवरी के बीच किसी तरह की मूल्यांकन परीक्षा आयोजित नहीं की गई। स्कूल को इसके लिए प्रश्न पत्र भी नहीं मिले। हां, इससे पहले प्री-बोर्ड और सेंटअप परीक्षाएं जरूर आयोजित की गई थीं। जैक की ओर से मॉक टेस्ट भी आयोजित किया गया था। -उद्देश्वरी पोद्दार, प्राचार्य, जिला स्कूल

आरएमएसए के तहत मूल्यांकन परीक्षा के लिए जो प्रश्न पत्र स्कूलों को उपलब्ध कराए गए थे, वे गोपनीय पैकेट में बंद नहीं थे। स्कूलों के मुताबिक, एक ही पैकेट में सभी छह विषयों के प्रश्न पत्र भेज दिए गए थे। एक विषय के प्रश्न पत्र पर एक कागज रख कर दूसरे विषय का प्रश्न पत्र रखा गया था। ऐसे में पहले दिन की परीक्षा में ही सभी विषयों के प्रश्न पत्र लीक हो गए थे।

मैट्रिक के परीक्षार्थियों का डर खत्म हो जाए, इसलिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान ने उसके पहले मूल्यांकन परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया था। इसका पैटर्न बिल्कुल मैट्रिक परीक्षा की तरह का है। प्रश्न पत्र भी उसी तरह से तैयार किए गए थे। इस परीक्षा में शामिल होकर छात्र-छात्राएं अपनी तैयारी भी परख सकते थे, लेकिन अफसरों की लापरवाही ने 11 स्कूलों के बच्चों से यह मौका छीन लिया।

{उत्क्रमित उच्च विद्यालय, टुंडू

{ केजीबीवी, टुंडी

{ उत्क्रमित उच्च विद्यालय, मोराडीह

{ जिला स्कूल, धनबाद

{ उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बेनागोड़िया

{ केजीबीवी, तोपचांची

{ उत्क्रमित उच्च विद्यालय, मैरनावाटांड़

{ केजीबीवी, निरसा

{ केजीबीवी, झरिया

{ केजीबीवी, बलियापुर

{ उत्क्रमित उच्च विद्यालय, ओझाडीह कटनिया, टुंडी

उत्क्रमि उच्च विद्यालय, टुंडू के लिए तैयार किया गया प्रश्न पत्र का पैकेट।

मूल्यांकन परीक्षा के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान ने धनबाद जिले को 5.5 लाख रुपए आवंटित किए थे। इनमें से 3.66 लाख रुपए प्रश्न पत्र सह उत्तर पुस्तिका छपवाने के लिए, 1000 रुपए प्रधानाध्यापकों के साथ बैठक के लिए, 50 हजार रुपए परीक्षा आयोजित करने के लिए और 1.5 लाख रुपए परीक्षा की वीडियोग्राफी के लिए दिए गए थे। सवाल उठता है कि जब 11 स्कूलों में परीक्षाएं हुई ही नहीं, तो आवंटित राशि का क्या हुआ‌?

स्टेट लाइब्रेरी के कंप्यूटर कक्ष में पड़े प्रश्न पत्रों के पैकेट।

Q क्या सभी हाई स्कूलों में मूल्यांकन परीक्षा हो गई?

Aहां,25 से 30 जनवरी के बीच आयोजित की गई परीक्षा।

Q उनकी वीडियोग्राफी भी जरूर कराई गई होगी?

Aजरूरहुई होगी। सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए थे।

Q तो फिर 11 स्कूलों के प्रश्न पत्र स्टेट लाइब्रेरी में कैसे पड़े हैं?

Aक्या?...प्रश्न पत्र वहां हैं? वे अतिरिक्त प्रश्न पत्र होंगे।

Q लेकिन 11 स्कूलों के प्रधानाध्यापक भी कह रहे हैं कि परीक्षा नहीं हुई‌। क्या वे गलत बोल रहे हैं‌?

Aअच्छा...ऐसा है? मुझे मातहतों ने बताया था कि सभी स्कूलों में परीक्षा हो गई।

Q अब आप क्या करेंगे?

Aयहगंभीर मामला है। जांच करूंगा। दोषियों पर कार्रवाई करूंगा।

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